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मध्यप्रदेश: क्या है बहुमत का आंकड़ा? 'दादी' ने कांग्रेस को 1967 में सत्ता से किया था बेदखल

Wed, 11 Mar 2020 01:06 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
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ज्योतिरादित्य सिंधिया-कमलनाथ (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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मध्यप्रदेश में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच आखिरकार होली के दिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी से नाराज चल रहे सिंधिया के साथ-साथ छह राज्य मंत्रियों समेत 19 कांग्रेस विधायकों ने भी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है। सिंधिया के इस कदम से कमलनाथ सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

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हालांकि, आनन-फानन में कांग्रेस ने भी सिंधिया को पार्टी से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया। अब भाजपा ने मध्यप्रदेश में सरकार बनाने की कवायद तेज कर दी है। वहीं, सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही हैं। 

विधायकों के इस्तीफे के बाद क्या है जादुई आंकड़ा?

विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार संकट में आ गई है। इस्तीफे स्वीकार होने की स्थिति में कांग्रेस के पास सिर्फ 94 विधायक रह जाएंगे, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष भी शामिल हैं। फिलहाल कमलनाथ सरकार के पास चार निर्दलियों समेत सपा का एक और बसपा के दो विधायकों का समर्थन है।

ऐसे में कमलनाथ के पास 101 विधायकों का समर्थन होगा। जबकि इस्तीफा मंजूर होने की स्थिति में सरकार बनाने के लिए 105 विधायकों की जरूरत होगी। भाजपा के पास अभी 107 विधायक हैं। यानी भाजपा के पास जादुई आंकड़ा है।

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16 मार्च को शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में अगर भाजपा अविश्वास प्रस्ताव लाती है, तो कमलनाथ के लिए सरकार बचाना मुश्किल होगा।

53 साल पहले दादी ने कांग्रेस को किया था सत्ता से बेदखल

मध्यप्रदेश में उपजे मौजूदा घटनाक्रम ने राजनीति में सिंधिया परिवार के 53 साल पुराने इतिहास को दोहरा दिया। 1967 में ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयाराजे सिंधिया की वजह से कांग्रेस सत्ता से बेदखल हुई थी और अब उनके पोते की वजह से कमलनाथ सरकार गिरने की कगार पर है।

1967 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के ठीक पहले राजमाता विजयाराजे ने कांग्रेस छोड़ दी थी। उन्होंने विधानसभा और लोकसभा के चुनाव स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर लड़ा और दोनों चुनाव जीतीं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत हासिल हुआ और डीपी मिश्रा मुख्यमंत्री बने। लेकिन, इसके बाद ही 36 कांग्रेस विधायकों ने विजयाराजे के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर की और विपक्ष से मिल गए। डीपी मिश्रा को इस्तीफा देना पड़ा।

ट्रेंड कर रहा राजस्थान और महाराष्ट्र
मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान और महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन होने के कयास लगाए जाने लगे हैं। सोशल मीडिया पर लोग ज्योतिरादित्य सिंधिया को बधाई दे रहे हैं और कह रहे हैं कि सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा को भी उन्हीं की राह पर चलना चाहिए।

यूजर्स लिख रहे हैं कि सिंधिया के बाद सचिन पायलट राजस्थान सरकार का भी यही हाल करेंगे। फिर मिलिंद देवड़ा और जतिन प्रसाद महाराष्ट्र सरकार का, कुछ दिन की मेहमान हैं दोनों सरकार। कांग्रेस अब पार्टी नहीं एनजीओ ज्यादा है? 
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किसने क्या कहा? 

मध्यप्रदेश संकट पर नेताओं की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता अरुण यादव ने सिलसिलेवार तरीके से ट्वीट कर सिंधिया को निशाने पर लिया। उन्होंने अपने पहले ट्वीट में कहा, 'ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा अपनाए गए चरित्र को लेकर मुझे जरा भी अफसोस नहीं है। सिंधिया खानदान ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी जिस अंग्रेज हुकूमत और उनका साथ देने वाली विचारधारा की पंक्ति में खड़े होकर उनकी मदद की थी।'

यादव ने अपने दूसरे ट्वीट में कहा, 'आज ज्योतिरादित्य ने उसी घिनौनी विचारधारा के साथ एक बार पुनः खड़े होकर अपने पूर्वजों को सलामी दी है। आने वाला वक्त अपने स्वार्थों के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के 15 वर्षों तक किए गए ईमानदारी पूर्ण जमीनी संघर्ष के बाद पाई सत्ता को अपने निजी स्वार्थों के लिए झोंक देने वाले जयचंदों-मीर जाफरों को  कड़ा सबक सिखाएगा।'

जीतू पटवारी का सिंधिया पर पलटवार

मध्यप्रदेश सरकार में खेल मंत्री जीतू पटवारी ने ट्वीट कर कहा, 'एक इतिहास बना था 1857 में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की मौत से, फिर एक इतिहास बना था 1967 में संविद सरकार से और आज फिर एक इतिहास बन रहा है..। तीनों में यह कहा गया है कि हां हम हैं....।'

सिंधिया जननेता के तौर परबड़े नेता नहीं: प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर कहा, 'उन लोगों के लिए हैरान हूं जिन्हें कांग्रेस से जुड़े गांधी परिवार के सरनेम पर आपत्ति होती थी। वही लोग आज सिंधिया के पार्टी छोड़ने को बड़ा झटका बता रहे हैं। लेकिन, सच्चाई ये है कि सिंधिया जननेता और प्रशासक के तौर पर बहुत बड़े नहीं हैं।' 

 
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