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MP का पहला स्मार्ट विलेज: दमोह के इस गांव की बिना सरकारी मदद के बदली तस्वीर, CCTV कैमरों से होती है निगरानी

Mon, 07 Nov 2022 01:20 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

MP का पहला स्मार्ट विलेज: दमोह के इस गांव की बिना सरकारी मदद के बदली तस्वीर, CCTV कैमरों से होती है निगरानी
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मध्यप्रदेश का पहला स्मार्ट विलेज - फोटो : सोशल मीडिया
दमोह जिले के जबेरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत खैरी सिंगौरगढ़ का पड़रिया थोवन गांव मध्यप्रदेश का  इकलौता स्मार्ट विलेज है। इस गांव की दीवारें स्वच्छता का संदेश देती हैं, तो वहीं पूरे गांव की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। यह गांव शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी आगे है। पड़रिया थोवन विलेज में करीब 40 परिवार रहते हैं, जिसमें 315 सदस्य हैं। यहां के रहने वाले लोगों में कोई एमबीए है तो  कोई एयर फोर्स, पुलिस, बिजली कंपनी और बैंकिंग जैसे सेक्टर में काम करता है। गांव का कोई भी व्यक्ति नशा नहीं करता, क्योंकि नशा करने वाले पर पूरा गांव नजर रखता है। गांव के प्रत्येक व्यक्ति का डेटा वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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8 सीसीटीवी कैमरों से होती है निगरानी - फोटो : अमर उजाला
स्मार्ट क्लासरूम में होती है पढ़ाई
जिले के जबेरा ब्लॉक से दो किमी अंदर स्थित है। यह स्मार्ट गांव पूरे मध्यप्रदेश के लिए मिसाल बन गया है। पूरा गांव ओडीएफ डबल प्लस कैटेगिरी में है और यह 3 साल पहले शुरू हुआ। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर अमेरिका निवासी रजनीश वाजपेई और मुंबई निवासी योगेश साहू ने इसे स्मार्ट गांव फाउंडेशन से जोड़ा। दोनों ने फांउडेशन की मदद से गांव में आठ कैमरे, आठ एड्रेसिंग सिस्टम, स्ट्रीट लाइट, सोलर लाइटें लगवाई। यहां तक कि गांव की दीवारों पर पेटिंग और आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को पढ़ाने के लिए पाठ्य सामग्री तक उपलब्ध कराई। गांव में प्राइमरी स्कूल है, जिसमें स्मार्ट टीवी लगाई गई है। यहां पर गांव के एक-एक मकान और उसके लोगों का डेटा वेबसाइट पर उपलब्ध है। यही नहीं गांव का पूरा नक्शा अलग से तैयार करवाया गया है। गांव के तालाब, गोचर भूमि, कृषि योग्य जमीन, नहर, सड़कें एवं घर किसका है यह सभी जानकारी सिर्फ एक लिंक से प्राप्त की जा सकती है। हर परिवार का डेटा फीड किया जा रहा है, जो एक क्लिक पर उपलब्ध होगा। दुनिया के किसी भी कोने से गांव के किसी भी व्यक्ति से संपर्क किया जा सकता है।
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ग्रामीण खुद करते हैं साफ सफाई - फोटो : अमर उजाला
स्मार्ट गांव डेवलपमेंट फाउंडेशन ने कराए हैं विकास कार्य
रजनीश बाजपेई ने बताया उनके एक दोस्त सत्येंद्र सिंह जबेरा के रहने वाले हैं। उनसे संपर्क करने पर इस गांव के बारे में जानकारी लगी। सेटेलाइट से पूरे गांव की निगरानी की और उसके  बाद गांव का रि-डेवलपमेंट प्लान तैयार करवाया। यहां के पब्लिक एड्रेस सिस्टम की विशेषता यह है कि गांव में हों या कहीं ओर  इंटरनेट के माध्यम से सीधे ग्रामीणों के साथ बातचीत कर सकते हैं। यहां पर स्मार्ट क्लासरूम सहित अनेक सुविधाएं बहुत ही कम समय में सुनिश्चित हुई हैं।

ग्रामीण राजेंद्र वर्मन ने बताया की उनका गांव स्मार्ट गांव है। पिछले पांच वर्षों से लगातार आगे बढ़ रहा है। गांव के युवा इसे बेहतर बनाने प्रयास कर रहे हैं। स्मार्ट गांव डेवलपमेंट फाउंडेशन की तरफ से गांव में सीसीटीवी कैमरा है, पब्लिक एनॉउंसमेंट सिस्टम हैं।
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गांव की हर जानकारी डिजिटल उपलब्ध है - फोटो : सोशल मीडिया
उपसरपंच अंशुल बाजपेई ने बताया की हमारा गांव पड़रिया थोवन देश, दुनिया में अपना नाम कर रहा है। जिसकी वजह है हमारे गांव के लोगों की सोच। हमारे गांव के लोग अपने गांव की साफ सफाई स्वयं करते हैं। स्मार्ट गांव फाउंडेशन बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने इस गांव में विकास किया।

अनुज बाजपेई का कहना है कि आज हमारा गांव पूरे देश में अलग ही नाम कर रहा है। स्मार्ट गांव फाउंडेशन की मदद से पिछले चार साल से जो सुविधाएं जुटी हैं, उससे गांव में डस्टबिन है, स्ट्रीट लाइट हैं। सीसीटीवी कैमरा है, बच्चों के लिए स्मार्ट फर्नीचर है। सारे गांव में वॉल पेंटिंग है। यह सारी चीजें होने के बाद यहां के ग्रामीण सौहार्द्र और शांति के साथ रहते हैं। लगातार हम गांव की बेहतरी के लिए युवाओं के साथ प्रयास कर रहे हैं।
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