कांच के टुकड़े लगने से फूटी युवक की आंख
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खंडवा जिला अस्पताल में सोमवार को ऑक्सीजन फ्लोमीटर फटने से एक युवक की आंख की पुतली फट गई। अस्पताल के टीबी वार्ड में भर्ती मरीज को दी जा रही ऑक्सीजन के सिलेंडर का प्रेशर बढ़ने से हादसा हुआ। सिलेंडर में लगा कांच का फ्लोमीटर फट कर मरीज के परिजन की आंख में जा लगा। घायल को अस्पताल के ही नेत्र वार्ड में भर्ती कराया गया है। वहीं वार्ड में ड्यूटी देने वाली नर्स के गाल पर भी चोट के निशान आए हैं।
सिविल सर्जन बोले, परिजनों ने प्रेशर बढ़ाने का बनाया दबाव
इस मामले में सिविल सर्जन ने बताया कि परिजनों ने मरीज को दी जा रही ऑक्सीजन का फ्लो हाई करने का दबाव बनाया। प्रेशर बढ़ते ही सिलिंडर में लगा कांच का फ्लोमीटर फट गया। इस हादसे में मरीज के परिजन के साथ नर्सिंग स्टाफ भी घायल हुआ है। मामले की जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
घायल का आरोप, वार्ड बॉय को नहीं थी सिलेंडर चलाने की जानकारी
दुर्घटना में घायल पदमकुंड निवासी मोइन शाह ने बताया खालवा निवासी मेरी मौसी का लड़का टीबी वार्ड में भर्ती था। रात 11 बजे फोन आया कि उसे घबराहट हो रही है। उसे ऑक्सीजन की आवश्यकता थी, लेकिन उसे ऑक्सीजन सही तरीके से मिल नहीं पा रही थी। वहां मौजूद वार्ड बॉय को ऑक्सीजन सिलिंडर को खोलने और बंद करने के तरीकों की जानकारी नहीं थी। जब वार्ड बॉय सिलिंडर लाया तो मैंने जाकर उसकी सहायता की। वार्ड में मौजूद सिस्टर ने जब सिलिंडर का वॉल खोलने के लिए कहा तो वार्ड बॉय ने वॉल इतना ज्यादा खोला कि सिलिंडर के ऊपर लगी कांच बॉटल ब्लास्ट हो गई। उसका टुकड़ा उड़कर मेरी आंख में घुस गया। डॉक्टर ने बताया कि आंख की काली पुतली फट गई है। दो ऑपरेशन कराने के लिए इंदौर जाना पड़ेगा। ऑपरेशन के लिए 50 हजार रुपये का खर्च आएगा। मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि मैं अपना ऑपरेशन करा सकूं। डॉक्टर ने कहा रोशनी आने की कोई गारंटी नहीं है। दूसरी आंख से भी सही से देखते नहीं बन रहा।
मरीज की आंख की कराएंगे आज सोनोग्राफी
सिविल सर्जन डॉ. ओपी जुगतावत ने बताया कि वार्ड की नर्स के अनुसार परिजन मरीज को दी जा रही ऑक्सीजन के फ्लो को तेज कर रहे थे। जिससे फ्लोमीटर के कांच की बोतल फटने से परिजन और स्टाफ को चोट आई। मरीज को नेत्र विशेषज्ञ ने देखा है। उसकी आंख की सोनोग्राफी भी कराएंगे। वहीं, नेत्र वार्ड में डॉक्टरों ने मरीज से उसकी फाइल में लिखवाया कि ऑपरेशन के दौरान आंख की रोशनी जा सकती है। इसकी जिम्मेदारी डॉक्टर-स्टॉफ की नहीं बल्कि मरीज और उसके परिजन की रहेगी।