बुजुर्ग दंपति से समझाइश करते पुलिस अधीक्षक
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जिले में साइबर ठगी के एक बड़े मामले में पुलिस की सतर्कता ने बुजुर्ग दंपति को 60 लाख रुपये की भारी ठगी से बचा लिया। साइबर ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस कमिश्नर बताकर बुजुर्ग दंपति को मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी मामले में फंसाने की धमकी दी और करीब 15 दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा।
ठगों के लगातार डराने-धमकाने से दंपति इस कदर भयभीत हो गए थे कि वे अपनी जीवनभर की जमा पूंजी के रूप में रखी 60 लाख रुपये की एफडी तुड़वाकर ठगों के बताए खाते में ट्रांसफर करने ही वाले थे। इसी दौरान इंदौर क्राइम ब्रांच से मिली गुप्त सूचना पर नीमच पुलिस हरकत में आई।
पुलिस अधीक्षक अंकित जायसवाल के निर्देशन में साइबर सेल प्रभारी प्रदीप शिंदे और उनकी टीम ने महज 7 मिनट के भीतर विकास नगर स्थित बुजुर्ग दंपति के घर पहुंचकर कार्रवाई की। शुरुआत में दंपति इतने डरे हुए थे कि पुलिस से भी बात करने को तैयार नहीं थे। इसके बाद साइबर सेल की टीम ने करीब 2 घंटे तक काउंसलिंग कर उन्हें विश्वास में लिया और पूरी ठगी की साजिश को समझाया।
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पुलिस ने दंपति को बताया कि कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती और न ही सीबीआई, ईडी या पुलिस कभी वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ या गिरफ्तारी करती है। इसके बाद दंपति को ठगों के चंगुल से पूरी तरह मुक्त कराया गया।
एसपी अंकित जायसवाल ने स्वयं बुजुर्ग दंपति से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाया और जिले के नागरिकों से अपील की है कि सीबीआई, ईडी या पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर पूछताछ या गिरफ्तारी नहीं करती है। इसलिए किसी भी अनजान कॉल या धमकी से डरकर अपनी गोपनीय जानकारी साझा न करें।