मणिपुर में हालात इन दिनों बहुत पेचीदा हैं। वहां हुई हिंसा के बाद फंसे छात्रों को अलग-अलग राज्यों ने रेस्क्यू कर लिया है। लेकिन मध्यप्रदेश सहित कुछ अन्य राज्यों के लोग अभी भी वहां दंगा ग्रस्त क्षेत्रों में फंसे हुए हैं। तनाव ग्रस्त क्षेत्रों में फंसे छात्रों के परिजनों ने भी सरकार से गुहार लगाई है कि वे उनके बच्चों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाल लें। ऐसे में मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी एक बयान दिया है कि, मणिपुर के सीएम से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की बात हुई है। हम भी हमारे स्तर पर बच्चों से बात करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ बच्चों ने हमें वहां से निकालने की बात कही है तो, कुछ का कहना है कि वे वहां सुरक्षित हैं। हम वहां पर फंसे हुए बच्चों को रुटीन फ्लाइट से एयरलिफ्ट कर पहले कोलकाता लाएंगे, उसके बाद उन्हें मध्यप्रदेश लाया जाएगा। गृह मंत्री का बयान आने के बाद मणिपुर में फंसे छात्रों के परिजनों ने राहत की सांस ली है। उन्हें भरोसा है कि उनके बच्चे अब सुरक्षित घर वापस आ जाएंगे। बता दें, शनिवार को पंधाना विधायक ने भी सीएम को पत्र लिखकर सभी छात्रों के एयरलिफ्ट करने की मांग की थी।
मणिपुर में पिछले कुछ दिनों से हिंसा और उन्माद अपने चरम पर है। राज्य के लगभग 10 जिले पूरी तरह से हिंसा की चपेट में हैं, और आधिकारिक रूप से अब तक राज्य में हुए उपद्रव के कारण करीब 54 लोगों की जान जा चुकी है। इसी बीच मणिपुर की राजधानी इंफाल में स्थित राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय में पढ़ने गए मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के तीन विद्यार्थियों सहित प्रदेश के अन्य जिलों के लगभग 20 विद्यार्थियों के वहां फंसे होने की खबरें आ रही हैं। इसी को लेकर उनके परिजनों ने भी सरकार से छात्रों को एयरलिफ्ट कराने की गुहार लगाई थी।
परिजन भी लगा चुके हैं मदद की गुहार
बता दें मणिपुर हिंसा में फंसे छात्रों के परिजनों ने भी मध्यप्रदेश सरकार से गुहार लगायी थी कि, उनके बच्चों को वहां से सुरक्षित निकाला जाये। परिजनों ने बताया था कि उनके बच्चे वहां बहुत डरे सहमे हुए हैं क्योंकि, विश्व विद्यालय परिसर के पास ही बमबारी और गोलीबारी हो रही है। चारों तरफ अफरा तफरी का माहौल है ऐसे में कई राज्यों के बच्चे अपनी सरकारों की मदद से वापस अपने घर जा चुके हैं। इसलिए हम भी चाहते हैं कि, हमारे बच्चे भी जल्द ही सुरक्षित हमारे घर लौट आएं। हालांकि गृहमंत्री का बयान आने के बाद से ही उन्होंने राहत की सांस ली हैं।