मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में लगी याचिकाओं को सारहीन बताते हुए निरस्त कर दिया गया है।
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मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाओं को सारहीन बताते हुए निराकृत कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मप्र शासन ने अध्यादेश निरस्त कर दिया है, इसलिए इन याचिकाओं का कोई मतलब नहीं।
मध्य प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के संबंध में दो दर्जन से अधिक याचिकाएं दायर की गई थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस पी के कौरव की युगलपीठ को बताया गया कि त्रिस्तरीय चुनाव के संबंध जारी अध्यादेश सरकार द्वारा निरस्त कर दिया गया है। युगलपीठ ने सारहीन होने के कारण सभी याचिकओं को निराकृत कर दिया।
भोपाल निवासी मनमोहन नायर तथा गाडरवाडा निवासी संदीप पटेल व अन्य की तरफ से दायर याचिकाओं में प्रदेश में होने वाले तीन चरणों में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया है राज्य सरकार ने पूर्व में तरह आरक्षण लागू कर चुनाव करवाने के संबंध में अध्यादेश पारित किया है। सरकार द्वारा उक्त अध्यादेश कांग्रेस शासनकाल में निर्धारित आरक्षण को निरस्त कर लागू किया गया है। प्रदेश सरकार का उक्त अध्यादेश पंचायत चुनाव एक्ट का उल्लंघन करता है।
याचिका में कहा गया था कि पंचायत एक्ट में रोटेशन व्यवस्था का प्रावधान है। पूर्व की तरफ आरक्षण करना पंचायत एक्ट की रोटेशन व्यवस्था के खिलाफ है। इसके अलावा 2018 में निवाड़ी जिले का गठन किया गया है। बिना सीमांकन किए नए जिले में पंचायत चुनाव नहीं करवाए जा सकते हैं। मंगलवार को सुनवाई के दौरान चुनाव संबंधित अध्यादेश सरकार द्वारा निरस्त कर दिए जाने की जानकारी युगलपीठ को दी गई। जिसके कारण युगलपीठ ने सभी याचिकाएं सारहीन होने के निराकृत कर दीं। याचिकाकर्ताओं की तरफ से पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर, अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा तथा इंटरविनर की तरफ से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने पैरवी की।
बता दें कि पंचायत चुनाव के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि एक मामले में दो कोर्ट को शामिल नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता अपना पक्ष हाई कोर्ट में ही रखें। नौ दिसंबर को हाईकोर्ट ने मामले पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था और सरकार के अध्यादेश पर स्थगन नहीं दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 243 (O) में निहित प्रावधान के तहत चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाने के बाद अदालत को उसमें हस्तक्षेप का अधिकार नहीं रहता।
19 जनवरी को मध्य प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई बंद कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चूंकि अध्यादेश खत्म हो गया है और चुनाव रद्द हो गए हैं, इसलिए इस संदर्भ में दाखिल याचिका निष्प्रभावी हो चुकी है।