मध्यप्रदेश में कई जिलों से मॉकपोल को ईवीएम से नहीं हटाए जाने की खबरें आई थीं जिसको लेकर विवाद छिड़ गया था। इस विवाद पर विराम लगाते हुए अब मध्यप्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी वी. एल. कांताराव ने कहा है कि ऐसी मशीनें जिनमें मतगणना से पहले मॉकपोल के वोट क्लियर नहीं किए गए उन्हें मतगणना के दौरान आखिरी वक्त में गिनती के लिए लिया जाएगा और वीवीपैट स्लिप की गिनती होगी।
निष्पक्षता के लिए किया जाने वाला मॉकपोल 27 जिलों के 144 मतदान केंद्रों में तब विवाद की जड़ बन गया था जब पीठासीन अधिकारियों ने मतदान से पहले मॉकपोल के वोट क्लियर नहीं किए थे। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, भिंड, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, सिंगरौली, विदिशा, रायसेन, गुना, बालाघाट, दमोह, सागर, सतना, पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, रीवा, कटनी, रतलाम, झाबुआ, नीमच, देवास, बड़वानी, राजगढ़ और छिंदवाड़ा में यह गलती सामने आई है। पहले पीठासीन अधिकारों ने अपनी गलती छुपाने का प्रयास किया मगर पर्यवेक्षक की मुस्तैदी से मामले का पता चला।
क्या होता है मॉकपोल
चुनाव से आधे घंटे पहले मॉकपोल किया जाता है ताकि सभी दलों के प्रतिनिधि यह देख सकें कि मशीन ठीक ढंग से चल रही है। आयोग के निर्देशों के मुताबिक मॉकपोल के बाद पीठासीन अधिकारी को क्लोज, रिजल्ट और क्लियर का बटन दबाना होता है। 144 केंद्रो पर हुई इस गलती में कहा जा रहा कि मॉक पोल के वोटों की संख्या 500 तक हो सकती है। जीत का अंतर कम होने पर यह आंकड़ा विवाद का सबब बन सकता है। विवाद से बचने के लिए ही आयोग ने इन मशीनों को अलग रखने का फैसला लिया है। अब वीवीपैट पर्चियों का