श्रावण के प्रथम दिन से ही इंदौर-इच्छापुर हाईवे शिवमय हो गया है। जगह-जगह श्रद्धालु बोल बम, हर हर महादेव के जयकारों के साथ चलते दिखाई देते हैं। पूरे मार्ग पर भक्तों के लिए भंडारे, सेवा शिविर और विश्राम स्थल भी बनाए गए हैं।
श्रावण मास प्रारंभ होते ही ओंकारेश्वर क्षेत्र के नर्मदा घाटों पर शिवभक्ति का उल्लास और श्रद्धा का महासागर लहराने लगा है। शुक्रवार, 11 जुलाई को जैसे ही श्रावण मास की पहली सुबह हुई, वैसे ही सैकड़ों कांवड़ियों ने 'हर-हर महादेव' के उद्घोष के साथ मां नर्मदा के पवित्र तट से जल भरकर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन की ओर कांवड़ यात्रा शुरू कर दी।
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उत्तर प्रदेश के बरेली से आए जय श्री महाकाल बेड़ा संघ के नेतृत्व में इस वर्ष भी यह यात्रा भव्य रूप में निकली। संघ के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पहले मां नर्मदा का विधिवत पूजन और आरती की, फिर कंधे पर कांवड़ रखकर जल लेकर इंदौर-खंडवा-इच्छापुर मार्ग होते हुए उज्जैन की ओर रवाना हो गए। बरेली महाकाल बेड़ा संघ के प्रमुख प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि यह यात्रा स्वर्गीय महेंद्र सिंह सत्यप्रकाश अग्रवाल की प्रेरणा से प्रारंभ हुई थी। अब यह परंपरा अपने 19वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। उन्होंने बताया कि इस बार 230 श्रद्धालु ओंकारेश्वर के खेड़ीघाट-बड़वाह से कांवड़ यात्रा पर निकले हैं और वे बुधवार को उज्जैन पहुंचकर बाबा महाकाल को जल अर्पित करेंगे।
145 किलोमीटर की पदयात्रा
यह कांवड़ यात्रा मात्र एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भक्ति, तपस्या और शिवप्रेम की अद्भुत मिसाल बन चुकी है। श्रद्धालु लगभग 145 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा करते हुए अपने कंधों पर मां नर्मदा का जल लेकर महाकाल के दरबार तक पहुंचते हैं। यह यात्रा उनकी मनोकामना पूर्ति, आत्मिक शांति और भगवान शिव की आराधना के लिए होती है।
रास्ता शिवमय, वातावरण भक्तिमय
श्रावण के प्रथम दिन से ही इंदौर-इच्छापुर हाईवे शिवमय हो गया है। जगह-जगह श्रद्धालु बोल बम – हर हर महादेव के जयकारों के साथ चलते दिखाई देते हैं। सड़कें नारंगी वस्त्रधारी शिवभक्तों से पटी नजर आईं। पूरे मार्ग पर भक्तों के लिए भंडारे, सेवा शिविर और विश्राम स्थल भी बनाए गए हैं।