फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MP News: दिव्यांग सुदामा ने जीती नेशनल जूडो चैंपियनशिप, कहा-इंटरनेशनल खेल जीत भारत को गौरान्वित करने की इच्छा

Sun, 09 Mar 2025 10:40 PM IST
कटनी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटनी

सार

कटनी की दिव्यांग जूडो खिलाड़ी सुदामा चक्रवर्ती ने लखनऊ में हुई नेशनल जूडो चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर जिले और एमपी का नाम रोशन किया। आर्थिक तंगी और सरकारी सहायता न मिलने के बावजूद उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। अब वे इंटरनेशनल पैरा ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड जीतना चाहती हैं।
विज्ञापन
दिव्यांग सुदामा चक्रवर्ती ने जीता नेशनल जूडो चैंपियनशिप।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कटनी की दिव्यांग बेटी सुदामा चक्रवर्ती ने अपने हौसले और मेहनत के दम पर लखनऊ में आयोजित नेशनल जूडो चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर जिले और मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया। ढीमरखेड़ा तहसील के छोटे से गांव दशरमन की रहने वाली सुदामा ने आंखों की कमजोरी को कभी अपनी सफलता में बाधा नहीं बनने दिया।

सुदामा 2015 से जूडो प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने पहली बार गोवा में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद 2016 में लखनऊ में ब्रॉन्ज, 2017 में गुड़गांव में गोल्ड, और 2018 में दिल्ली में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इस साल 2025 में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने तीसरा स्थान हासिल किया। अब उनकी ख्वाहिश है कि वह इंटरनेशनल पैरा ओलंपिक चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करें और देश के लिए गोल्ड मेडल जीतें।

तीन दिन की तैयारी में बड़ी जीत
सुदामा ने बताया कि वह बाल विकास पर्यवेक्षक की परीक्षा की तैयारी कर रही थीं, तभी 22 फरवरी को जूडो चैंपियनशिप की सूचना मिली। महज तीन दिन की तैयारी के बाद 23 फरवरी को लखनऊ रवाना होकर उन्होंने 27 फरवरी को ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। इस प्रतियोगिता में उन्हें आठ मुकाबले खेलने थे, लेकिन तीन प्रतिद्वंद्वियों को हराकर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की।

अब तक नहीं मिली सरकारी सहायता
इतने मेडल जीतने के बावजूद सुदामा को अब तक सरकार से कोई प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। नियम के अनुसार, गोल्ड मेडल पर 1.03 लाख रुपये, सिल्वर पर 75 हजार और ब्रॉन्ज पर 50 हजार रुपये दिए जाते हैं, लेकिन सुदामा को इस योजना का लाभ नहीं मिला।

संघर्ष भरा जीवन, सरकार से मदद की गुहार
सुदामा एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता छोटेलाल चक्रवर्ती मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। शादी के बाद भी आर्थिक तंगी बनी रही। उन्होंने आईटीआई से कोपा किया है और वर्तमान में जबलपुर से डाटा एंट्री का कोर्स कर रही हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण नियमित प्रैक्टिस नहीं कर पातीं।

सुदामा ने शासन-प्रशासन से अपील की है कि उन्हें आर्थिक सहायता और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान की जाएं, ताकि वे इंटरनेशनल जूडो चैंपियनशिप में भाग लेकर भारत के लिए गोल्ड मेडल जीत सकें।

 

दिव्यांग सुदामा चक्रवर्ती ने जीता नेशनल जूडो चैंपियनशिप।

 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें