मुख्यमंत्री कमलनाथ के गृह जनपद छिंदवाड़ा में आंखों के ऑपरेशन के बाद चार मरीजों की आंखों की रोशनी जाने का मामला सामने आया है। वहीं, इस घटना के संज्ञान में आने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जांच के आदेश दिए हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने मरीजों को 20-20 लाख मुआवजा देने की मांग की है।
छिंदवाड़ा के जिला चिकित्सालय में 25 सितंबर को चार मरीजों की आंखों के ऑपरेशन हुए, इस ऑपरेशन के बाद मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। जिसके बाद वे अपने घर चले गए, मगर मंगलवार को उन्हें दिखाई देना बंद हो गया।
आंखों की रोशनी जाने के बाद मरीज अपने परिजनों के साथ अस्पताल पहुंचे और अपनी पेरशानी बताई, लेकिन किसी भी डॉक्टर ने कोई सुध नहीं ली।
हालांकि, अस्पताल के अधिकारियों ने अभी तक पुष्टि नहीं की है कि क्या वे वास्तव में दृष्टि खो चुके हैं या यह एक अस्थायी समस्या है। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुशील राठी ने कहा कि चार में से तीन रोगियों को गुरुवार सुबह आगे के इलाज के लिए भोपाल भेजा गया। एक चौथे मरीज मुन्ना का नागपुर में इलाज चल रहा है।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने चार लोगों की आंखों की रोशनी जाने के मामले में कहा है कि छिंदवाड़ा में मोतियाबिंद के ऑपरेशन बाद मरीजों की रोशनी जाने का मामला सामने आने पर इसकी जांच के आदेश दिए गए है। जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इन मरीजों के इलाज का खर्च सरकार उठाएगी और इनकी रोशनी वापस लाने के सभी प्रयास किए जाएंगे।
विधानसभा नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने इस घटना के संबंध में कहा कि यह कितना लापरवाही भरा मामला है, मुख्यमंत्री के जिले में स्वास्थय सुविधाएं अगर ऐसी हैं तो प्रदेश की स्वास्थय सेवाएं किस तरह चरमराई हुई होंगी, इस बात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
हाल ही में, राज्य के इंदौर में एक निजी अस्पताल में कथित तौर पर मोतियाबिंद सर्जरी के बाद एक दर्जन से अधिक रोगियों ने आंखों की दृष्टि खो दी थी।