मध्य प्रदेश के आगर मालवा पुलिस की राजस्थान के डग क्षेत्र में मादक पदार्थ को लेकर की गई कार्रवाई सवालों के घेरे में है। इस पूरे मामले में अब एमपी की पुलिस कटघरे में खड़ी है। राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट ने 30 मिनट में की गई पूरी कार्रवाई को संदिग्ध मानकर दो थाना प्रभारियों और 100 पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान में संभवतः इस प्रकार का यह पहला मामला है जो दोनों राज्यों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
30 मिनिट में हुई पूरी कार्रवाई संदिग्ध
कोर्ट के आदेश पर पुलिस विभाग के जांच अधिकारी ने एमपी पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। जांच में सामने आया कि पुलिस द्वारा किए गए जब्ती के दावे से संबंधित कई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।साथ ही वीडियोग्राफी का दावा भी झूठा था। इसके अलावा, सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि मध्य प्रदेश पुलिस के वाहन गांव में केवल 30 मिनट ही रुके थे, जबकि इतने कम समय में एनडीपीएस अधिनियम के तहत तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं है।
जांच के बाद केस दर्ज
इसी जांच रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने एमपी पुलिस की तत्कालीन आगर थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, थाना प्रभारी रूपसिंह बैस, उप निरीक्षक राखी गुर्जर, सहायक उप निरीक्षक अजय जाट और पुलिसकर्मी राहुल विश्वकर्मा व शुभम सहित पूरी टीम पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया।
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दस लाख रुपये मांगने का भी पुलिस पर आरोप
इस्तगासे में पीड़ित हमीद खान ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस ने उनसे 10 लाख रुपये की मांग की। जब उन्होंने कहा कि किसान लोग इतने रुपये कहां से लाएंगे और रुपये देने में असमर्थता जताई, तो उन्हें आगर थाने ले जाया गया। वहां गिरफ्तार दोनों व्यक्तियों के खिलाफ दो किलो एमडी, 1 किलो स्मैक, कैटामाइन, नशीले इंजेक्शन, केमिकल ड्रम, 2 राइफलें आदि यानी 5 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त होना बताकर केस दर्ज कर दिया गया।