पत्नी द्वारा घरेलू हिंसा से महिला का संरक्षण अधिनियम के तहत की गई शिकायत को निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट में दायर याचिका को खारिज कर दिया गया। हाईकोर्ट की जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने सीआरपीसी की धारा 482 के तहत याचिका दायर की है, जो केवल एफआईआर को निरस्त करने का प्रावधान देती है। इस धारा के तहत घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर शिकायत के आरोपों को निरस्त नहीं किया जा सकता।
जबलपुर निवासी संदीप रघुवंशी और उनके परिवार के सदस्यों ने यह याचिका दायर की थी। इसमें पत्नी द्वारा घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज शिकायत को निरस्त करने की मांग की गई थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि संदीप ने हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 12 के तहत विवाह को शून्य व अमान्य घोषित करने के लिए आवेदन किया था, जिसके बाद पत्नी ने घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज करवाई। इसके पहले पत्नी ने आईपीसी की धारा 498-ए, 377, 506, 34 और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत भी आपराधिक शिकायतें दर्ज करवाई थीं। हाईकोर्ट ने उनके पिता और बहन के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर को पहले ही निरस्त कर दिया था।
एकलपीठ ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अदालत केवल एफआईआर निरस्त कर सकती है, लेकिन घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दर्ज शिकायत की समीक्षा नहीं कर सकती। अधिनियम की धारा 3 में वर्णित तत्वों के आधार पर आरोप लगाए गए हैं, जिनकी समीक्षा सीआरपीसी की धारा 482 के तहत संभव नहीं है। इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया।