मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
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बुरहानपुर में निर्धारित समयावधि समाप्त होने के बाद भी जलावर्धन योजना का काम पूरा न होने व गुणवत्ताहीन कार्य किए जाने का आरोप लगाते हुए मामले को हाईकोर्ट में जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने मामले में नगरीय प्रशासन विभाग सहित अन्य को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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यह जनहित का मामला बुरहानपुर निवासी डॉ. सूर्यकांत उर्फ आनंद दीक्षित की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता धर्मेन्द्र सोनी ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि बुरहानपुर नगर निगम सीमा के अंतर्गत नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से जलावर्धन योजना वर्ष 2017 में प्रारंभ की गई थी। जिसका कार्य पांच वर्ष में पूर्ण होना था। आवेदक की ओर से कहा गया कि निर्धारित समयावधि समाप्त होने के बाद भी महज पांच फीसदी ही काम हुआ है, जबकि अब तक 130 करोड़ रुपये की राशि खर्च हो चुकी है। इतना ही नहीं जल योजना के लिए जहां पर पाइप डाले गए हैं, वह महज जमीन से पांच इंच नीचे ही हैं, पूरा कार्य गुणवत्ताहीन है। इसको लेकर संबंधित अधिकारियों को शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। मामले में कहा गया कि भीषण गर्मी प्रारंभ होने वाली है, लेकिन अब तक कार्य में कोई तेजी नहीं है। याचिका में राहत चाही गई कि बुरहानपुर के बाशिंदों को गर्मी में पेयजल उपलब्ध कराया जाए, इसके साथ ही उक्त मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के मामलों की जांच कर वैधानिक कार्यवाही की जाए।
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मामले में प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन विभाग, मप्र नगरीय विकास कंपनी, आयुक्त नगरीय प्रशासन विभाग, प्रोजेक्ट डायरेक्टर मप्र नगरीय विभाग कंपनी, कलेक्टर बुरहानपुर, नगर निगम बुरहानपुर, जेएमसी प्रोजेक्ट इंडिया लिमिटेड व मेसर्स रेमकी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमि. को पक्षकार बनाया गया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।