मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड में लेखापाल के पदों की नियमित नियुक्ति नहीं किए जाने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में बताया गया कि हाउसिंग बोर्ड में कुल 58 लेखापाल पद स्वीकृत हैं, जिनमें से केवल 9 पदों पर ही नियमित अधिकारी नियुक्त हैं। इस पर हाईकोर्ट के जस्टिस विनय सराफ की एकलपीठ ने मामले का निराकरण करते हुए मध्य प्रदेश आवास व अधोसंरचना विकास मंडल के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को निर्देश दिया है कि 60 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का समाधान करते हुए स्पष्ट आदेश जारी करें।
याचिका में जबलपुर के धनवंतरी नगर निवासी हेमंत कुमार वाजपेई ने कहा कि वह पहले मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड में यूडीसी के पद पर कार्यरत थे। अक्टूबर 2022 में उन्होंने लेखापाल पद के लिए सभी योग्यताएं पूरी कर ली थीं, लेकिन उन्हें यूडीसी का वेतन दिया जाता था, जबकि लेखापाल का कार्य सौंपा जाता था। अक्टूबर 2024 में उन्होंने लेखापाल पद पर नियमित पदोन्नति के लिए अभ्यावेदन दिया था, लेकिन इसका कोई निराकरण अब तक नहीं किया गया।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि हाउसिंग बोर्ड के अप्रैल 2017 के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार लेखापाल के 58 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इन पर केवल 9 अधिकारी ही नियमित रूप से नियुक्त हैं। शेष पदों पर प्रभारी लेखापाल के रूप में कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है, और उन्हें यूडीसी का वेतन दिया जा रहा है। याचिका की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने संबंधित अधिकारी को आदेश जारी करने के निर्देश दिए।