मां को नौकरी का लेटर बताता आकाश
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ये एक ऐसे मां और बेटे की संघर्ष की कहानी है, जिन्होंने जीवन के 18 साल कड़े संघर्ष में बिताए, लेकिन सफलता के लिए हमेशा प्रयास जारी रखे और उम्मीद का दामन थामे रखा। पति की मौत हो गई तो मां दूसरों के घर बर्तन धोने जाती थी, जो भी कमाती थी, वह बेटे की पढ़ाई पर खर्च करती थी। आखिर मेहनत रंग लाई और अब बेटे आकाश की ट्रॉपिकल फॉरेस्ट इंस्टीट्यूट जबलपुर में प्रथम श्रेणी अधिकारी के रूप में नौकरी लगी है। सोमवार को आकाश ने यह नौकरी ज्वाइन भी कर ली।