सार
पहले छह माह में पेड़ों की जनगणना के अलावा सभी पेड़ों को जियोटैग किया जाएगा और इसी तरह, नियमित अंतराल पर पेड़ों की जनगणना की जाएगी, ताकि यह जांचा जा सके कि किसी पेड़ की अवैध कटाई तो नहीं की गई।
इंदौर में होगी पेड़ों की गिनती।
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इंदौर को सबसे साफ और सबसे स्मार्ट शहर का दर्जा मिल चुका है, लेकिन हरियाली के मामले में इंदौर को दूसरे शहर मात दे रहे है। अब नगर निगम ने ग्रीन इंदौर के लिए भी प्लान तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट के लिए स्मार्ट सिटी कंपनी ने टेंडर जारी किए है। जिस कंपनी को जिम्मेदारी मिलेगी। वह इंदौर में पहले पेड़ों की गिनती और जियो टैगिंग की जाएगी। कंपनी पांच सालों में शहर की हरियाली बढ़ाने पर जोर देगी।
आईएससीडीएल के सीईओ दिव्यांक सिंह ने कहा कि कंपनी ने पांच साल की अवधि के इस कार्यक्रम को शुरू करने के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं, जिसे इंदौर शहर में लगाए गए पेड़ों की संख्या और उनकी सभी प्रकार की प्रजातियों का दस्तावेजीकरण करने के लिए वृक्ष गणना पहले की जाएगी। साथ शुरू किया जाएगा। टेंडर की प्रक्रिया के बाद जिस निजी कंपनी को काम सौंपा जाएगा, वह आईएससीडीएल और इंदौर नगर निगम के समन्वय और निगरानी में काम करेगी।
पहले छह माह में पेड़ों की जनगणना के अलावा सभी पेड़ों को जियोटैग किया जाएगा और इसी तरह, नियमित अंतराल पर पेड़ों की जनगणना की जाएगी, ताकि यह जांचा जा सके कि किसी पेड़ की अवैध कटाई तो नहीं की गई। शहर के खुले हिस्सों में सघन वृक्षारोपण किया जाएगा। इसके अलावा सिटी फारेस्ट वाले हिस्सों को भी विकसित किया जाएगा।
पहले भी हो चुकी है गणना
शहर की हरियाली को लेकर ग्रीन ट्रिब्यूनल में शहर के सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने याचिका लगाई थी। ट्रिब्यूनल ने तब नगर निगम को पेड़ों की गिनती करने के लिए कहा था। तब कुछ माह तक अफसरों ने पेड़ों की गिनती की, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं मिल। इंदौर के मास्टर प्लान में हरियाली का प्रतिशत 15 है, लेकिन शहर में 10 प्रतिशत से भी कम हरियाली है, ज्यादातर ग्रीन बेल्ट वाले हिस्से में अवैध बसाहट हो चुकी है।