देश के जो इलाके प्लेट बाउंड्री पर है, वहां भूकंप का खतरा ज्यादा है। बिहार, उत्तराखंड, नेपाल में भूकंप का खतरा अक्सर मंडराता है। ये शहर बाउंड्री प्लेट पर है। मध्य प्रदेश का ज्यादातर हिस्सा सुरक्षित है। जबलपुर और नर्मदा घाटी में जरुर भूकंप के जोन मेें माना जाता है, लेकिन यहां ज्यादा तीव्रता का भूकंप नहीं आ सकता है, इसलिए चिंता की बात नहीं है।
यह बात भूकंप वैैज्ञानिक और अखिल भारतीय तकनीकी परिषद (एआईसीटीई) के चेयरमेन डा.टीजी सीताराम ने कही। वे देवी अहिल्या विवि के दीक्षांत समारो ह में शामिल होने आए थे। जोशी मठ में आई दरारों को लेकर उन्होंने कहा कि जोशी मठ की दरारें भूकंप की वजह से नहीं है। यह शहर ग्लेशियर के मलबे पर बसा है और ढलान पर है। उसकी जमीन ज्यादा भार वहन नहीं कर सकती है। इस तरह के इलाकों में ज्यादा निर्माण नहीं होना चाहिए थे।
जोशी मठ के भूर्गभ का हिस्सा खोखला है। वह अस्थिर हो रहा है। इसलिए दरारें आ रही है। कुछ मकानों में पहले भी दरारें आती थी, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। अब प्रभावितों की संख्या बढ़ गई है। इंदौर को लेकर उन्होंने कहा कि यह शहर स्वच्छता की मिसाल बन चुका है। यहां सफाई का सिस्टम बन चुका है और लोगों में भी जागरुकता आई है। सीतराम ने कहा कि इंदौर एज्यूकेशन हब है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र में सात आदिवासी बहुल्य जिले आते हैै। वहां के विद्यार्थी बेहतर शिक्षा पा रहे है। यह अच्छी बात है।