इन निर्दोष जानों की आंच सेे अफसर नहीं बच सकते।
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बेलेश्वर मंदिर का हादसा रोका जा सकता था, यदि शहर के अफसर और ट्रस्ट के पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाते, लेकिन उन्होंने लापरवाही बरती, इसलिए वे भी इस हादसे के जिम्मेदार है। अतिक्रमण, अवैध कब्जा, जर्जर भवन जैसे बिन्दूअेां को अफसर नजरअंदाज करते रहे और कीमत 36 लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ी।
शाम तक ठोस प्लान ही नहीं
कलेक्टर इलैया राजा टी हादसे की गंभीरता नहीं समझ पाए। हादसे होने के तीन चार घंटे तक प्रशासन मौत के आंकड़े छुपाने की कोशिश करता रहा। बचाव कार्य के लिए कोई ठोस योजना पर काम ही नहीं हुआ शाम को सेना से बचाव के लिए मदद मांगी। यदि हादसा होते ही सेना की मदद का फैसला लिया जाता तो हो सकता है कि इतनी जानें नहीं जाती।
नोटिस के बावजूद नहीं हटाया अतिक्रमण
ट्रस्ट अध्यक्ष और पूर्व भाजपा पार्षद सेवाराम गलानी और सचिव मुरली सबनानी हादसे के बड़े जिम्मेदार है। नगर निगम के नोटिस को हलके में लिया। जबाव में बावड़ी को अतिक्रमण से मुक्त करने की बात की, लेकिन अतिक्रमण नहीं हटाया। जर्जर बावड़ी होने के बावजूद हवन के लिए इतने लोगों को वहां बैठने दिया।
नोटिस देकर खानापूर्ति, नहीं लिया एक्शन
क्षेत्र के भवन अधिकारी पीआर अरोलिया ने इस साल एक जनवरी को नए मंदिर निर्माण को लेकर ट्रस्ट को नोटिस दिया। ट्रस्ट ने पुराना मंदिर जर्जर होने और बावड़ी को अेापन करने का जवाब नोटिस में लिखा, लेकिन भवन अधिकारी ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। यदि मौके पर जाकर पुराने मंदिर का सेफ्टी आडिट समय पर होता तो वहां भीड़ जैसे आयोजन पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम भी निगम उठा सकता है। वैसे कुछ हुआ नहीं, इसलिए भवन अधिकारी भी हादसे के दोषी है।