साहित्य सामग्री की दुकानें बढ़ रहीं
आज भी इंदौर में पुस्तकों की सात-आठ दशक से ज्यादा पुरानी दुकानें अस्तित्व में हैं। गांधी हॉल के समीप रामपुरा वाला बिल्डिंग में रूपायन, अपोलो टावर में रीडर्स पैराडाइज, सरदार सोहन सिंह और सर्वोदय साहित्य भंडार आज भी इंदौर के पुस्तक प्रेमियों के ठीये हैं। इसके अलावा नगर में पुस्तकों की दुकानें कुछ मॉलों में, खजूरी बाजार में और रविवार को सुबह लगने वाले बाजारों में नजर आती हैं और यहां बड़ी संख्या में पुस्तक प्रेमी मिल जाते हैं।
क्या कहते हैं पुस्तक विक्रेता
नगर के प्रसिद्ध और प्राचीन पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि आज भी नियमित ग्राहक पुस्तक खरीदने के लिए आते हैं। उन्हें जो पुस्तक पसंद है और यदि वह उपलब्ध नहीं है तो उसे आर्डर देकर बुलाया जाता है। कुछ पुस्तक प्रेमी तो ऑनलाइन खरीदी करते हैं। हिंदी पुस्तकों के प्रमुख विक्रेता सर्वोदय साहित्य भंडार के संचालक का कहना कि आज भी पुस्तकें खरीदी जाती हैं और पाठक तलाश करने आते हैं।
पुस्तकों की निजी लाइब्रेरी
नगर में कुछ साहित्यकारों की निजी लाइब्रेरी हैं। इनमें तीन से पांच हजार पुस्तकों का संग्रह है। नगर में कुछ स्पोर्ट्स क्लबों में लाइब्रेरी हैं, जहां बच्चे जेरिनिमो शेल्टोन, विंपी किड्स डायरी, सुधा मूर्ति, अमिष त्रिपाठी की पुस्तकें पढ़ते हैं। राष्ट्र भाषा उन्ननयन संस्थान के अर्पण जैन निजी लाइब्रेरी का अभियान चला रहे हैं। नगर की कुछ सार्वजनिक और कई निजी लाइब्रेरी में पढ़ने वाले छात्रों का समूह भी नजर आता है।
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