दोस्तों के साथ एमपीपीएससी टाॅपर दीपिका पाटीदार।
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ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी दीपिका पाटीदार की कहानी भी दसवीं फेल फिल्म के किरदार जैसी है। पांच बार उन्होंने असफलता का स्वाद चखा और फिर सफलता ने आखिरकार उनका मुंह मीठा कराया। सीधे टाॅपर का सेहरा बंधा।
अब वे डिप्टी कलेक्टर बनेगी। दीपिका कहती है कि एमपीपीएस परीक्षा के लिए बांधना तो पड़ता है, कई पारिवारिक आयोजन छोड़ना पड़ते है, लेकिन जो मेरे जीवन में जरुरी थे। मेरे अभिभावक, मेरे दोस्तों के लिए हमेशा मैने भरपूर समय रखा। वे ही मेरा स्पोर्ट सिस्टम थे। तैयारी के दौरान कई बार लगता था कि मैं नहीं कर पाऊंगी, मायूस हो जाती थी, तो अपने ही हौसला देते थे। उनसे हमेशा जुड़े रही।
दीपिका कहती है कि जब भी रिजल्ट आता था और मेरा नाम लिस्ट में नहीं आता था तो मैं उनको फोन लगाती थी। दोस्त कहते थे। कोई बात नहीं फिर कोशिश कर, हो जाएगा। उन्हें मुझ पर भरोसा था। मेरे जितने भी खास दोस्त थे, उन्होंने मेरा नंबर नक्सट डीसी (डिप्टी कलेक्टर) के नाम पर सेव कर रखा था।
असफलता के बाद जब भी मैं निराश हो जाती थी तो वे मुझे मेरे मेरे नाम का स्क्रीन शाॅट भेजते थे। वे हमेशा कहते थे कि देखना एक दिन तुम कर सफल जरुर होगी। मैं टाॅपरों की टेस्ट की काॅपियां देखती थी। वे कैसा लिखते है, उनका क्या तरीका होता है। इस तरह मैने तैयारी की।
सबके भरोसे ने मेरा हौसला बढ़ाया और मैने टाॅप किया। दीपिका कहती है जो भी इस परीक्षा में सफल होना चाहते है, उनके लिए मेरी टिप्स है कि वे खुद पर और भगवान पर भरोसा रखे। निरंतर प्रयास रखे। मैं वो उदाहरण हुं। जिसने लगातार असफलता देखी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
सहेली से मिली प्रेरणा
मध्य प्रदेश के छोटे से गांव जामगोद की दीपिका ने कभी नहीं सोचा था कि वह राज्य सेवा परीक्षा की टाॅपर बनेगी। दीपिका बताती है कि मैं तो इंदौर में सिर्फ काॅलेज में पढ़कर शिक्षित होना चाहती थी। मेरी एक सहेली ने मुझे प्रेरणा दी। उनसे कहा कि एक परीक्षा होती है जिसमे पास हो जाए तो बड़े अधिकारी बनते है। बस उसके बाद से मैने राज्य सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। वर्ष 2018 में मेरी उस सहेली का सिलेक्शन हो गया था। उसने लगातार मेरी हिम्मत बढ़ाई।