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MP News:पूर्व विधायक दत्तीगांव बोले-पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बने रहे, इसलिए गई थी कांग्रेस की सरकार

Tue, 26 Aug 2025 08:32 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

दत्तीगांव ने कहा कि दिग्विजय सिंह और कमल नाथ कांग्रेस के अनुभवी नेता है।सरकार गिरने की जिम्मेदारी उन्हें संयुक्त रुप से लेना चाहिए। एक-दूसरे पर दोष नहीं मढ़ना चाहिए। सरकार बनने के बाद उनका जो रवैया रहा। उसे प्रदेश की जनता ने भी महसूस किया।
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राजवर्धन सिंह दत्तीगांव - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पांच साल पहले गिरी कांग्रेस की सरकार को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जो खुलासे किए हैं, उससे मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। अब दिग्विजय सिंह पर पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने निशाना साधा है। दत्तीगांव ने कहा कि तब पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बने रहे, इसलिए कांग्रेस की सरकार गई थी। 

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बता दें, एक पॉडकॉस्ट के बाद पूर्व सीएम कमलनाथ ने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह पर आरोप लगाए हैं। 2020 में कांग्रेस सरकार गिरने से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक मंत्री और विधायक बेंगलुरू के एक रिसोर्ट में रुके थे। इसे ऑपरेशन लोटस नाम दिया गया था। कांग्रेस की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे राजवर्धन सिंह दत्तीगांव भी बेंगलुरू में थे। बाद में वे शिवराज सरकार में मंत्री बने थे।  

उन्होंने कांग्रेस में चल रही मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल पर अमर उजाला से चर्चा में कहा कि कांग्रेस का अंतरकलह सामने आ रहा है। तब कांग्रेस की सरकार बनाने में जो नेता भागीदार थे, उन्हें सरकार बनने के बाद सम्मान नहीं दिया गया। कांग्रेस के चुनाव अभियान की जिम्मेदारी तब ज्योतिरादित्य सिंधिया को दी गई थी। उन्होंने पूरे प्रदेश में जन समर्थन जुटाया था, लेकिन दिग्विजय सिंह-कमलनाथ पुत्रमोह में धृतराष्ट्र बने रहे। उन्होंने जो वचन पत्र जनता के सामने रखा था। उसके साथ न्याय नहीं किया। उनकी जवाबदारी थी कि वे सरकार ठीक से चलाएं, लेकिन वे भाई-भतीजावाद में लग गए।
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जिम्मेदारी ले, एक दूसरे पर दोष न मढ़ें
भाजपा नेता दत्तीगांव ने कहा कि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ कांग्रेस के अनुभवी नेता हैं। सरकार गिरने की जिम्मेदारी उन्हें संयुक्त रूप से लेना चाहिए। एक-दूसरे पर दोष नहीं मढ़ना चाहिए। सरकार बनने के बाद उनका जो रवैया रहा। उसे प्रदेश की जनता ने भी महसूस किया। वचन पत्र की घोषणाएं पूरी नहीं होने पर ज्योदिरादित्य सिंधिया ने सार्वजनिक तौर पर सड़क पर उतरने की बात कही तो कमल नाथ को आत्ममंथन करना चाहिए था। इसके बजाए उन्होंने तल्ख प्रतिक्रिया दी। कई बार हथियार से ज्यादा शब्दों के वार घातक होते हैं।

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