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MP Election: देपालपुर सीट, त्रिकोणीय मुकाबले में चुना पटेल ही जाएगा, भाजपा के बागी ने बढ़ाई मुश्किलें

Sat, 04 Nov 2023 07:01 AM IST
दिनेश शर्मा कमलेश सेन, इंदौर

सार

यह सीट सज्जन सिंह विश्नार, नंदलाल जोशी, कन्हैयालाल खादीवाला, भागवत साबू, रामचंद्र अग्रवाल, रामेश्वर पटेल, निर्भय सिंह पटेल जैसे दिग्गजों की चुनावी रण भूमि रही है। इस बार फिर विशाल जगदीश पटेल व मनोज निर्भय सिंह पटेल आमने-सामने हैं। 
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मध्यप्रदेश चुनाव 2023 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के नाम को लेकर तरह तरह की भ्रांतियां व्याप्त हैं। इसे बड़ा गांव भी कहा जाता है। देपालपुर कृषि प्रधान क्षेत्र है और इंदौर से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित है। प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली से आच्छादित यह क्षेत्र आजादी के बाद से राजनीति में चर्चा का केंद्र बिंदु रहा। 1952 में मध्यभारत और 1957 में मध्य प्रदेश में देपालपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। यहां से राष्ट्रीय दल के दो उम्मीदवार चुनाव मैदान में रहते थे। एक अनुसूचित जाति से और एक सामान्य सीट से चुना जाता था। यह नियम 1962 से खत्म हो गया और अजा व सामान्य वर्ग के लिए पृथक सीटों का आरक्षण होने लगा।
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1952 एवं 1957 में आरक्षित सीट से प्रसिद्ध कांग्रेस नेता सज्जनसिंह विश्नार विजयी रहे थे, जबकि सामान्य सीट से 1952 में कन्हैयालाल खादीवाला और 1957 में नंदलाल जोशी कांग्रेस से ही विजय रहे थे।

1952 में नंदलाल जोशी चुने गए इंदौर के सांसद
यह एक संयोग है कि 1951-52 में इंदौर लोकसभा से नंदलाल जोशी सांसद चुने गए थे। इसके बाद 1957 के लोकसभा चुनाव में इंदौर से कन्हैयालाल खादीवाला विजयी रहे थे। इस तरह आरंभ में इंदौर को सांसद देने वाला क्षेत्र देपालपुर रहा है। नंदलाल जोशी 1962 में विधानसभा चुनाव में पराजित हो गए थे। कांग्रेस नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भागवत साबू 1967 में विजयी रहे थे। उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के बापूलाल मंडलोई को पराजित किया था। इसके बाद 1972 में कांग्रेस के रामचंद्र अग्रवाल विजयी रहे थे।
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1977 की जनता लहर में रतन पाटोदी विजयी रहे
1977 में कांग्रेस विरोधी लहर में रतन पाटोदी ने विजय हासिल की थी। 1980 में प्रसिद्ध भाजपा नेता निर्भय सिंह पटेल ने कांग्रेस के रामचंद्र अग्रवाल को पराजित किया था। 1985 में निर्भय सिंह पटेल कांग्रेस के रामेश्वर पटेल से चुनाव हार गए थे। 1990 और 1993 में निर्भय सिंह पटेल लगातार दो बार निर्वाचित हुए थे। 1997 में निर्भय सिंह पटेल के निधन बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के जगदीश पटेल विजयी रहे थे। 1998 में कांग्रेस के जगदीश पटेल, 2003 में भाजपा के मनोज निर्भय सिंह पटेल, 2008 में कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल, 2013 में भाजपा के मनोज निर्भय सिंह और 2018 में कांग्रेस के विशाल जगदीश पटेल विजयी रहे थे।



पिता पुत्र की विरासत रही यह सीट
देपालपुर विधानसभा क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखें तो पता चलता है कि यह सीट पिता-पुत्र की विरासत रही है। निर्भय सिंह पटेल और फिर उनके बेटे मनोज पटेल भाजपा से विधायक रहे। इसी तरह कांग्रेस से रामेश्वर पटेल और उनके बेटे सत्यनारायण पटेल विधायक चुने गए थे। इनके बाद कांग्रेस से ही जगदीश पटेल और उनके बेटे विशाल पटेल विजयी रहे।

72 साल के इतिहास में 44 साल पिता-पुत्र रहे विधायक
देपालपुर के चुनाव इतिहास में 1952 से 2023 के 72 सालों को देखें तो 44 साल यह सीट पिता-पुत्र और 28 साल अन्य के पास रही। प्रतिशत के अनुसार पिता-पुत्रों के बीच 61.12 प्रतिशत और अन्य के पास 38.88 प्रतिशत समय तक कब्जा रहा। 1980 के बाद से देपालपुर से विजयी होने वाला उम्मीदवार पटेल ही रहा है।

विधानसभा चुनाव 2023 में देपालपुर से कांग्रेस से वर्तमान विधायक विशाल जगदीश पटेल और भाजपा से पूर्व विधायक मनोज निर्भय सिंह पटेल उम्मीदवार हैं। वहीं, भाजपा से टिकट नहीं मिल पाने से बागी राजेंद्र चौधरी बतौर निर्दलीय मैदान में हैं। इस तरह देपालपुर में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। देपालपुर क्षेत्र में कलौता समाज, खाती, राजपूत और धाकड़ समाज का वोट निर्णायक होगा। इस त्रिकोणीय मुकाबले में परिणाम जो भी हो चुना पटेल ही जाएगा।

मतदाता संख्या
कुल मतदाता 2 लाख 67 हजार 360
पुरुष 1 लाख 34 हजार 904
महिला 1 लाख 32 हजार 449
थर्ड जेंडर 7
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देपालपुर सीट की रोचक जानकारी
  • सबसे ज्यादा मतों से जीत 2018 में मनोज पटेल की 30,197 वोट से हुई थी। सबसे कम मतों से 1972 में कांग्रेस के रामचंद्र अग्रवाल की 217 वोट से हुई थी।
  • सर्वाधिक उम्मीदवार 1990 में 12 थे और सबसे कम 1985 में 3 थे।
  • सर्वाधिक मतदान 2018 में तो न्यूनतम मतदान वर्ष 1957 में हुआ था।
  • 1952 से 2018 तक संपन्न चुनावों में 8 बार कांग्रेस, 1 बार सोशलिस्ट और 6 बार भाजपा का कब्जा रहा।
  • 15 चुनावों में 8 बार कांग्रेस और छह बार भाजपा, एक बार सोशलिस्ट पार्टी जीती

 
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