मध्यप्रदेश के इंदौर जिले से विधायक और सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भाजपा नेतृत्व ने नागपुर जिले की 12 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी थी। इनमें से 12 में से 9 सीटों पर भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार आगे हैं। इसके अलावा, विदर्भ में भी भाजपा का प्रदर्शन अच्छा है। विजयवर्गीय बीते तीन महीनों से महाराष्ट्र चुनाव में व्यस्त थे। इस दौरान वे कैबिनेट बैठकों में भी शामिल नहीं हो रहे थे। इसे लेकर मुख्यमंत्री और विजयवर्गीय के बीच तनातनी की खबरें भी आई थीं, लेकिन चुनाव के बाद हुई बैठक में विजयवर्गीय शामिल हुए तो इस चर्चाओं पर विराम लग गया।
उधर, नागपुर जिले में भाजपा की सफलता से विजयवर्गीय का कद बढ़ना तय है। अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव में उनके महाराष्ट्र के प्रदर्शन को देखते हुए विजयवर्गीय को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
भूमिका कमजोर होने की थी चर्चा
बता दें कि महाराष्ट्र चुनाव में मध्य प्रदेश के इंदौर से तीन सौ से ज्यादा नेता जुटे हुए थे। जातिगत समीकरणों के हिसाब से विजयवर्गीय ने उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी थीं। भाजपा संगठन ने जब उन्हें इंदौर की एक नंबर सीट से टिकट दिया था तो यह चर्चा होने लगी थी कि केंद्र में विजयवर्गीय की भूमिका कमजोर हो गई है। लेकिन, महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों ने उन्हें फिर एक बार अपनी राजनीति चमकाने का मौका दे दिया।
संघ के भी करीब आने का मौका मिला
नागपुर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का मुख्यालय भी है। जिले की ग्रामीण सीटों पर संघ की भी खासी पकड़ मानी जाती है। विजयवर्गीय ने नागपुर में तीन माह खूब मेहनत की। इस कारण उनके नंबर संघ की नजरों में भी बढ़ गए। विजयवर्गीय के साथ इंदौर से 300 से ज्यादा नेता व पदाधिकारियों की टीम जुटी थी।