इंदौर में कम बारिश से जलसंकट गहराने लगा है और नगर निगम 300 टैंकरों से जलापूर्ति कर रहा है। महापौर ने समीक्षा बैठक कर दिसंबर तक 5 नई टंकियां शुरू कर 30 एमएलडी पानी रिजर्व रखने और हार्वेस्टिंग न करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
इंदौर में इस वर्ष अल्पवर्षा के कारण जलसंकट की स्थिति निर्मित होने लगी है। अधिकांश बोरिंग ठीक से रिचार्ज नहीं हो सके हैं, वहीं नदी, नाले और तालाब भी पूरी तरह पानी से नहीं भर पाए हैं। वर्तमान में स्थिति यह है कि नगर निगम को विभिन्न क्षेत्रों में जलापूर्ति बनाए रखने के लिए रोजाना लगभग तीन सौ टैंकर दौड़ाने पड़ रहे हैं। दूसरी ओर, नगर निगम द्वारा रैन वॉटर हार्वेस्टिंग नियमों की अनदेखी करने वाली इमारतों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सीलिंग और स्पॉट फाइन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसके साथ ही शहर में बन रही पांच नई पानी की टंकियों को इस वर्ष के अंत तक पूरा कर उनमें तीन करोड़ लीटर पानी आरक्षित रखने की योजना बनाई गई है।
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महापौर ने जलप्रदाय विभाग की बुलाई आपात समीक्षा बैठक
गत वर्ष की तुलना में इस बार आधी वर्षा भी नहीं हुई और मानसून विदा हो गया। पिछले ग्रीष्मकाल में शहरवासियों ने भारी जल संकट का सामना किया था और इस बार भी मौसम के प्रभाव से संकट की आहट शुरू हो गई है। इसी परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जलप्रदाय विभाग की एक अहम समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा, अपर आयुक्त आशीष पाठक तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में आगामी छह महीनों की संभावित पानी की मांग, उपलब्ध जल स्रोतों, टंकियों, बोरिंगों की स्थिति और टैंकरों के संचालन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई, ताकि गर्मी आने से पहले ही सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा सकें।
भूजल स्तर गिरने की आशंका और नगर निगम की कार्ययोजना
बैठक के दौरान महापौर ने जानकारी दी कि इस बार दस से पंद्रह प्रतिशत कम वर्षा होने से भूजल रिचार्ज बेहतर तरीके से नहीं हो पाया है। इसके चलते जनवरी और फरवरी के महीनों में भूजल स्तर और नीचे गिरने तथा चुनौती खड़ी होने की संभावना है। निगम का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक नागरिक तक पर्याप्त पेयजल पहुंचाना रहेगा। इसके लिए जोन और वार्ड स्तर पर आवश्यकता के अनुरूप टैंकरों, टंकियों व अन्य स्रोतों से जलापूर्ति की रणनीति बनाई जा रही है। साथ ही निजी हाइड्रेंट और निजी टैंकरों की सूची भी तैयार की जा रही है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में उनका उपयोग शहर के प्रभावित इलाकों में किया जा सके।
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दिसंबर तक पूरी होंगी पांच नई टंकियां
पेयजल वितरण को सुचारू बनाने के लिए महापौर ने अधिकारियों को शहर की मुख्य टंकियों की क्षमता की समीक्षा करने के निर्देश दिए। योजना के अनुसार दिसंबर माह तक नौलखा, गोंदवाले, आजाद नगर, डाकिया तथा फल-बाग क्षेत्र की पांच नई टंकियों को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इनके शुरू होने से लगभग तीस एमएलडी यानी 3 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी रिजर्व रखा जा सकेगा। इसके अतिरिक्त फल-बाग क्षेत्र से जुड़ी करीब 12 से 13 अन्य टंकियों के संधारण और उनकी स्थिति सुधारने के कार्य समय पर पूरा करने के निर्देश जारी किए गए हैं।