इंदौर में दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट अनिवार्य करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए गए फैसले का असर शुक्रवार से देखने को मिला। शहर के पेट्रोल पंपों पर बगैर हेलमेट के पेट्रोल नहीं दिया गया। कई वाहन चालक पेट्रोल भरवाने के लिए दूसरे वाहन चालकों से थोड़ी देर के लिए हेलमेट देने की मिन्नतें करते भी नजर आए।
बैगर हेलमेट के पेट्रोल देने पर प्रशासन ने पंप सील करने की चेतावनी भी दी थी। शुक्रवार को पंपों पर भी निगरानी रखी गई। एक पंप बगैर हेलमेट पहने आए वाहन चालकों को पेट्रोल दे रहा था। जिसे अफसरों ने सील कर दिया।
ट्रैफिक सुधार को लेकर इंदौर में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की यातायात सुरक्षा समिति के अध्यक्ष अभय सप्रे ने बैठक ली थी। बैठक के दूसरे ही दिन कलेक्टर आशीष सिंह ने आदेश जारी कर दिए थे कि इंदौर में बगैर हेलमेट पहने वाहन चालक पंपो से पेट्रोल नहीं भरवा पाएंगे। मेडिकल स्थिति में छूट रहेगी। यदि पेट्रोल पंपों पर कर्मचारियों ने हेलमेट नहीं पहनने वाले वाहन चालकों को पेट्रोल दिया तो फिर पंपों को लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी दी गई थी।
यह आदेश शुक्रवार से लागू हो गया। अरंडिया गांव में एक पंप से कलेक्टर के आदेश का उल्लघंन कर रहा था। इसकी जानकारी मिलने के बाद अफसर मौके पर पहुंचे और पंप सील कर दिया गया। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि मेडिकल संबंधी मामलों में यह प्रतिबंध मान्य नहीं होगा। आदेश का पालन नहीं करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 223 के तहत एक्शन लिया जाएगा।
शासकीय कर्मचारियों के लिए भी हेलमेट अनिवार्य
कलेक्टर आशीष सिंह ने शुक्रवार को शहर के शासकीय कार्यालयों में भी कर्मचारियों को हेलमेट अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। जिसमे कहा गया है कि मप्र मोटर यान अधिनियम में दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट अनिवार्य है। हेलमेट पहनने से दुर्घटना में सिर पर गंभीर चोट का खतरा कम बना रहता है। कलेक्टर ने सभी अधिकारी व कर्मचारी अनिवार्य रुप से अधिनियम का पालन करें और शासकीय परिसर में हेलमेट पहनकर ही प्रवेश करें।
कोर्ट में भी याचिका लगी
बगैर हेलमेट के पेट्रोल नहीं देने के फैसले से पेट्रोल पंप संचालक नाराज है। उनका कहना है कि इससे उनकी बिक्री प्रभावित होगी। उधर इस मामले में इंदौर कोर्ट में जनहित याचिका भी लग गई है। जिसमे कहा गया है कि शहर में ट्रैफिक ज्यादा है। स्पीड काफी कम रहती है। इस कारण हेलमेट की अनिवार्यता नहीं होना चाहिए। इंदौर में छह साल पहले भी तत्कालीन कलेक्टर पी. नरहरि ने इस तरह का आदेश जारी किया था। कुछ दिनों तक सख्ती चली, लेकिन बाद में पंपों से बगैर हेलमेट के पेट्रोल दिया जाने लगा।