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मनोरंजन के पर्दे पर सामाजिक बदलाव की दस्तक: ट्रैफिक अवेयरनेस शॉर्ट फिल्मों को पुलिस अधिकारियों ने सराहा

Sun, 18 Oct 2026 06:40 AM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, एनसीसी कैडेट्स और गणमान्य नागरिकों के समक्ष प्रदर्शित हुईं फिल्ममेकर आलोक बाजपेयी की दो विशेष शॉर्ट फिल्में, कम समय में प्रभावी संदेश देने की अनूठी शैली बनी चर्चा का केंद्र।
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पुलिस अधिकारियों ने की सराहना। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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सिनेमा की असली ताकत सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करना नहीं, बल्कि उनकी सोच को प्रभावित करना और समाज को बेहतर दिशा देना भी है। इसी उद्देश्य को अपनी रचनात्मकता का आधार बनाकर सामाजिक सरोकारों पर प्रभावी शॉर्ट फिल्में बनाने वाले फिल्ममेकर आलोक बाजपेयी की फिल्म निर्माण शैली को इंदौर पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने खूब सराहा।
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यातायात जागरूकता पर केंद्रित बाजपेयी की दो शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के विद्यार्थियों, कलाकारों और अन्य गणमान्य नागरिकों के समक्ष किया गया। फिल्मों की प्रस्तुति, संदेश देने के नए अंदाज और मनोरंजन के साथ जागरूकता पैदा करने की शैली ने उपस्थित दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (हेडक्वार्टर एवं क्राइम) राजेश कुमार सिंह, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम एवं ट्रैफिक) राजेश कुमार त्रिपाठी तथा यातायात थाना प्रभारी अरविंद सिंह डांगी ने फिल्मों की सराहना की।

अधिकारियों ने बाजपेयी की फिल्मों को प्रभावी, अभिनव और कम समय में सटीक एवं गहरा संदेश देने वाली प्रस्तुतियां बताया। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि ये फिल्में अपनी बात मनोरंजक और अलग अंदाज में रखती हैं, जिससे उनका संदेश दर्शकों के मन में ठहरने की क्षमता रखता है। अधिकारियों ने आलोक बाजपेयी को इसी तरह की सामाजिक संदेशपरक फिल्मों का निर्माण जारी रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
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जब कहानी छोटी हो, लेकिन उसका असर बड़ा हो
आलोक बाजपेयी ने कहा कि आज के तेज रफ्तार डिजिटल दौर में, जहां दर्शकों का ध्यान कुछ ही पलों में दूसरी ओर चला जाता है, वहां शॉर्ट फिल्में सामाजिक जागरूकता का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। हमने सीमित समय में मनोरंजन, संवेदना और सामाजिक संदेश को एक साथ पिरोने का प्रयास किया है। यातायात जागरूकता जैसे विषय पर रचनात्मक सिनेमा का यह प्रयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि सड़क सुरक्षा का संदेश केवल नियमों की जानकारी तक सीमित न रहे, बल्कि लोगों की सोच और व्यवहार का हिस्सा बने। आलोक बाजपेयी ने कहा कि रचनात्मक सोच का मूल उद्देश्य स्पष्ट है, संदेश ऐसा हो जो केवल सुनाई न दे, बल्कि याद भी रहे। 
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