कंडे भी आए मार्केट मेें।
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इसके अलावा थोक में लकड़ी के भाव भी बढ़ गए हैं। जलाऊ लकड़ी एक हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। गैस संकट से पहले इसकी कीमत साढ़े सात सौ रुपये थी। अब ठेलों पर चाय स्टॉल लगाने वाले भी कोयला खरीदने आ रहे हैं। उधर गैस संकट के कारण कंडों की डिमांड भी पहले की तुलना में बढ़ गई है। दस रुपये प्रति नग मिलने वाले कंडे अब पंद्रह रुपये में बिक रहे हैं।
हालांकि, सरकार और प्रशासन ने अपने बयानों के माध्यम से हालात सामान्य होने की बात कही है। वहीं, गैस की किल्लत को लेकर भी तस्वीरे सामने आ रही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर जमीनी स्तर पर यह संकट कबतक खत्म होगा?