इंदौर के प्राचीन गणगौर घाट के हालात अब बदलने लगे हैं। नगर निगम ने घाटों को संवारने का जिम्मा लिया है। घाटों के आसपास के पुराने मंदिर और अन्य कलाकृतियों का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
निगम की मंशा है कि यह घाट पर्यटक के आकर्षण का केंद्र बने क्योंकि घाट के समीप की हरीराव छतरी को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत तीन साल पहले संवारा गया था। 200 साल पुरानी इन छत्रियों को देखने के लिए कुछ पर्यटक आते हैं लेकिन छतरी के आसपास के घाट भी व्यवस्थित हो जाएंगे तो यहां आने वालों की संख्या और बढ़ सकती है।
बीते दो माह से गणगौर घाट के आसपास से सैकड़ों टन गाद निकली गई। दल-दल में दबे घाटों की पहले मरम्मत की गई। अब उनका रंग रोगन भी किया जा रहा है। इस घाट को संवारने का फायदा कुछ दिनों बाद होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे में भी नगर निगम को मिल सकता है।
गणगौर घाट के अलावा नगर निगम ने पीलिया खाल क्षेत्र के घाट को भी सुंदर बनाया है। पिछले दिनों वहां पर सामूहिक योगा का आयोजन भी किया गया था। नगर निगम ने यहां महापौर परिषद की बैठक होने वाली है।
मलबे में दबे थे मंदिर
होलकर काल में इस घाट का काफी महत्व था। इस घाट पर हाथी नहाया करते थे। होलकर काल में होने वाले गणेशोत्सव के बाद राजपरिवार इस घाट पर ही प्रतिमा विसर्जित करने आता था। यह परंपरा आज भी निभाई जाती है। इस घाट पर पहले मलबे का ढेर होता था।
कई मंदिर मलबे में दबे थे। जिन्हें निगम ने निकाला और उनकी मरम्मत की। इस घाट के पास ही निगम एक ट्रीटमेंट प्लांट भी बना रहा है ताकि नदी में भी साफ पानी बहे। तीन साल पहले घाट के आसपास सीवरेज लाइन भी बिछाई गई थी। इस कारण आसपास की बस्तियों का सीवरेज नदी में नहीं मिलता है।