न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने किया दौरा।
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शहर में ट्रैफिक सुधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि वे ट्रैफिक सुधार को लेकर ठोस योजना बनाएं। उस पर काम करें और छह माह के भीतर परिणाम लाएं। उन्होंने सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने पर भी जोर दिया। सप्रे ने अफसरों की बैठक ली और बायपास पर हो रहे ब्रिजों के निर्माण को मौके पर जाकर भी देखा।
बैठक में जस्टिस सप्रे ने कहा कि हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और यातायात के पालन की आदतों को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक संगठनों की मदद लें। विद्यार्थियों के बीच जाएं और उन्हें इसका महत्व समझाएं। शराब पीकर वाहन चलाने वालों तथा यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। लोक परिवहन के वाहनों को बढ़ावा दिया जाए, जिससे सड़कों पर चलने वाले छोटे वाहनों की संख्या में कमी लाई जा सके।
हेलमेट अनिवार्य किया जाए
उन्होंने निर्देशित किया कि पुलिस विभाग सहित अन्य सभी शासकीय कर्मियों को वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना तत्काल रूप से अनिवार्य किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि स्कूलों एवं कॉलेजों सहित अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के विद्यार्थियों को भी हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाए। न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा कि इंदौर को स्वच्छता के साथ ही सड़क सुरक्षा एवं यातायात सुधार के क्षेत्र में भी देश में अव्वल हो सकता है। इंदौर में वह सभी क्षमताएं मौजूद हैं, जो यह कर दिखाने के लिए जरूरी हैं। यातायात सुधार से जुड़े कामों के लिए सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा संबंधी समिति पूरा सहयोग प्रदान करेगी।
ड्राइविंग टेस्ट में भी सख्ती बरतें
बैठक में इंदौर जिले में पांच वर्षों में हुई सड़क दुर्घटनाओं, ब्लैक स्पॉट व उनके सुधार के कामों की समीक्षा की। सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु की संख्या में कमी लाने पर जोर दिया गया। अफसरों से कहा गया कि वाहनों की फिटनेस की निरंतर चेकिंग होना चाहिए। ड्राइविंग टेस्ट में भी सख्ती बरतें। वाहनों का बीमा अनिवार्य रूप से कराया जाना चाहिए। वाहनों की ओवरलोडिंग को रोकने के लिये विशेष प्रयास हों।
मानक स्पीड में वाहन नहीं चलाने वालों के विरुद्ध यातायात पुलिस सख्ती से कार्रवाई करें। सड़क दुर्घटना में घायलों के लिए संचालित राहवीर योजना और कैशलेस ट्रीटमेंट योजना के क्रियान्वयन के निर्देश भी बैठक में दिए गए। न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा कि बैठक में दिए गए निर्देशों का समय सीमा में सभी विभाग पालन करें। इसकी रिपोर्ट कलेक्टर और जिला सड़क सुरक्षा समिति को दें।