कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय सोमवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के खंडवा रोड स्थित परिसर में जेन-जी से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं में सहनशक्ति की कमी है। वे जल्दी टूट जाते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।
उन्होंने भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे इसलिए सफल हुए, क्योंकि वे कभी मुश्किलों के सामने नहीं टूटे। उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना कर खुद को साबित किया।उन्होंने कहा कि अब लड़ाई जातियों की नहीं, बल्कि जेन-जी और जेन-अल्फा के बीच शुरू हो गई है।
इंद्रेश ने कहा कि आज के युवाओं को अपनी क्षमताओं को परखने की जरूरत है। जेन-जी बेकार नहीं है, बल्कि उनकी क्षमताओं का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यदि उन्हें खुद को साबित करने का मौका मिले, तो वे बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
उन्होंने संवाद कार्यक्रम में व्यक्तित्व विकास, सोशल मीडिया, धर्म और आस्था से जुड़े विषयों पर बात की। उन्होंने कहा कि जिस युग में हम हैं, वहां हमें ही बुराइयों का नाश करना है। इसके लिए भगवान प्रकट नहीं होंगे। हमारे आसपास असंख्य रावण और कंस हैं, उनका नाश हमें ही करना है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्थाओं में भी भागीदार होना चाहिए, ताकि वे देश के निर्णयों में अपनी भूमिका निभा सकें। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।इंद्रेश ने कहा कि करियर के साथ जीवन का उद्देश्य और पारिवारिक मूल्य भी जरूरी हैं। सफलता के लिए धैर्य और कठिन परिस्थितियों में टिके रहना जरूरी है। सफलता अचानक नहीं मिलती, उसके लिए समय देना पड़ता है। युवाओं को अपनी ऊर्जा और क्षमता का सही इस्तेमाल करना चाहिए।