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Indore: इंदौर में मालती जोशी स्मृति कल्प में वक्ता बोले- साहित्य की परख पुरस्कारों से नहीं होती

Sun, 14 Jun 2026 03:27 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

प्रख्यात कथाकार पद्मश्री मालती जोशी की स्मृति में रविवार को इंदौर के प्रीतमलाल दुआ सभागृह में स्मृति कल्प कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें साहित्य, कथा-लेखन और उनके योगदान पर वरिष्ठ साहित्यकारों एवं वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।
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स्मृति कल्प में अपनी बात रखते वक्ता। - फोटो : अमर उजाला
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प्रख्यात कथाकार पद्मश्री मालती जोशी की स्मृति में स्मृति कल्प कार्यक्रम का आयोजन रविवार को इंदौर के प्रीतमलाल दुआ सभागृह में किया गया। वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मीशंकर बाजपेयी ने कहा कि साहित्य की असली परख पुरस्कारों से नहीं होती। जो साहित्य पाठक को अपना लगे, भावनाओं से भरा हो, वही अच्छा माना जाता है। मालती जी भी इसी तरह लिखती थीं। उनकी कहानियों की अनुगूंज लंबे समय तक सुनाई देती थी। एक मौन क्रांति उनकी कहानियों में उभर कर आती थी। उन्होंने किस्सागोई को अपनी कहानियों में बचाए रखा।

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पटकथा लेखक अतुल तिवारी ने कहा कि मालती जोशी ने महिला कथाकारों के लिए श्रेष्ठतम मानदंड स्थापित किए। वे कहानी कहने की कला की सिद्धहस्त हस्ताक्षर थीं और अपनी कहानियों का वे बिना देखे पाठ करती थीं। उनकी कहानियाँ फ़िल्म के लिए बहुत अनुकूल थीं और गुलज़ार, जया बच्चन जैसे फिल्मकारों ने उनकी कहानियों पर टेलीफ़िल्म का निर्माण किया।
 

मंजूषा राजस जौहरी ने कहा कि मालती जोशी की कहानियाँ राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रसार के लिए पढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने मालती जी की कहानी आख़िरी शर्त का पाठ किया। कथाकार अनीता सक्सेना ने मालती जोशी जी के काव्य पक्ष पर चर्चा की। मुंबई से आई  शिक्षाविद मधुरा फड़के ने मालती जोशी की संवेदनशीलता और आत्मीयता पर अपना वक्तव्य दिया।

ब्रॉडकास्टर रंजना चितले ने मालती जोशी की कहानी “बोल री कठपुतली” का पाठ किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में ऋषिकेश जोशी ने स्वागत वक्तव्य दिया और मालती जी की स्मृति में बनाए ट्रस्ट के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का समापन सच्चिदानंद जोशी के वक्तव्य से हुआ। कार्यक्रम का संचालन रिया जोशी ने किया।

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