वह फ्लैट, जहां चिराग का परिवार रहता है।
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कारोबार के लिए लिया था कर्ज, विवेक की प्राॅपर्टी गिरवी थी बैंक में
चिराग और विवेक व्यापारिक साझेदार थे, लेकिन चार माह पहले अलग हो गए थे। दोनों में पैसे के लेनदेन को लेकर विवाद होता रहता था। इसके निपटारे के लिए विवेक ने चिराग को फोन किया था। इसके बाद विवेक सुबह ही उद्योगपति के घर पहुंचा। दोनो भिंड क्षेत्र के रहने वाले है। कुछ वर्षों पहले इंदौर में आकर रहने लगे थे। बता चला है कि साझेदारी के कारोबार के लिए कर्ज लिया गया था और विवेक की प्राॅपर्टी बैंक में कर्ज के एवज में गिरवी रखी हुई थी। विवेक चाहता था कि चिराग पैसे का निपटारा कर दे तो वह एक मुश्त लोन भरकर प्राॅपर्टी बैंक से फ्री करवा ले, लेकिन चिराग इसके लिए तैयार नहीं हो रहा था।
फैक्टरी पर तैनात कराए थे बाउंसर
चिराग का अरिहंत सेल्स के नाम से बहुत बड़ा व्यापार था। कृषि उपकरणों की सप्लाई का बड़ा नेटवर्क था। रक्षा पाइप फिटिंग सहित कई कंपनियों की एजेंसियां थी।दोनों की पार्टनरशीप टूटने के बाद विवाद बढ़ा था। चिराग ने विवेक के सांवेर रोड की फैक्टरी पर आने के लिए भी रोक लगा दी थी। वहां पर बाउंसर तैनात कर रखे थे। विवेक चिराग के इस रवैये से भी नाराज था।