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Indore: बेटा आरोपी से बोला-मेरे पापा को मत मारो, विवेक नहीं रुका, सीने पर किए 12 वार

Sat, 23 Aug 2025 03:22 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

बेटे ने चाकू देखकर विवेक से कहा-मेरे पापा को मत मारो, लेकिन विवेक के सिर पर खून सवार हो गया था। उसने एक के बाद एक 12 वार चिराग के सीने पर किए। फ्लैट के ड्राइंग रुम में खून फैल गया। चिराग ने संघर्ष करने की कोशिश की, लेकिन विवेक नहीं रुका। 
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इस फ्लैट में हुई चिराग की हत्या। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्कीम- 140 क्षेत्र की मिलन हाइट्स के 806 नंबर फ्लैट में उद्योगपति चिराग जैन की हत्या का चश्मदीद गवाह उसका बेटा विहान है। वह उस वक्त घर में था और सो रहा था। चिराग के व्यापारिक साझेदार विवेक ने जब लड़ाई शुरू की तो बेटा भी जाग गया था। विवेक टी शर्ट और बरमुडे में आया था। वह अपने साथ चाकू नहीं लाया था। विवाद ज्यादा बढ़ने पर वह चिराग के किचन में गया और सब्जी काटने वाला चाकू उठा लाया। उससे वार कर उनसे चिराग को मौत के घाट उतार दिया।

बेटे ने चाकू देखकर विवेक से कहा-मेरे पापा को मत मारो, लेकिन विवेक के सिर पर खून सवार हो गया था। उसने एक के बाद एक 12 वार चिराग के सीने पर किए। फ्लैट के ड्राइंग रुम में खून फैल गया। चिराग ने संघर्ष करने की कोशिश की, लेकिन विवेक नहीं रुका। फ्लैट के बाहर लिफ्ट तक खून फैला हुआ था। चिराग की मौके पर ही मौत हो गई।

ये भी पढ़ें-इंदौर में उद्योगपति की घर में ही चाकू मारकर हत्या, व्यापारिक साझेदार फरार

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वह फ्लैट, जहां चिराग का परिवार रहता है। - फोटो : अमर उजाला

कारोबार के लिए लिया था कर्ज, विवेक की प्राॅपर्टी गिरवी थी बैंक में

 

चिराग और विवेक व्यापारिक साझेदार थे, लेकिन चार माह पहले अलग हो गए थे। दोनों में पैसे के लेनदेन को लेकर विवाद होता रहता था। इसके निपटारे के लिए विवेक ने चिराग को फोन किया था। इसके बाद विवेक सुबह ही उद्योगपति के घर पहुंचा। दोनो भिंड क्षेत्र के रहने वाले है। कुछ वर्षों पहले इंदौर में आकर रहने लगे थे। बता चला है कि साझेदारी के कारोबार के लिए कर्ज लिया गया था और विवेक की प्राॅपर्टी बैंक में कर्ज के एवज में गिरवी रखी हुई थी। विवेक चाहता था कि चिराग पैसे का निपटारा कर दे तो वह एक मुश्त लोन भरकर प्राॅपर्टी बैंक से फ्री करवा ले, लेकिन चिराग इसके लिए तैयार नहीं हो रहा था।

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चिराग जैन। - फोटो : अमर उजाला

फैक्टरी पर तैनात कराए थे बाउंसर

चिराग का अरिहंत सेल्स के नाम से बहुत बड़ा व्यापार था। कृषि उपकरणों की सप्लाई का बड़ा नेटवर्क था। रक्षा पाइप फिटिंग सहित कई कंपनियों की एजेंसियां थी।दोनों की पार्टनरशीप टूटने के बाद विवाद बढ़ा था। चिराग ने विवेक के सांवेर रोड की फैक्टरी पर आने के लिए भी रोक लगा दी थी। वहां पर बाउंसर तैनात कर रखे थे। विवेक चिराग के इस रवैये से भी नाराज था।

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