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भागीरथपुरा हादसा: दस दिन में बिक गई थी उल्टी-दस्त की छह महीने की दवाएं, स्वास्थ्य विभाग को खबर ही नहीं

Sun, 04 Jan 2026 08:07 AM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैले डायरिया और हैजे ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। दस दिनों से बस्ती में हाहाकार मचा था, दवाइयों का छह महीने का स्टॉक दस दिन में खत्म हो गया, लेकिन जमीनी स्तर पर तैनात अमला सोता रहा।
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केमिस्ट आदर्श सिकरवार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर के भागीरथपुरा में न केवल नगर निगम, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की भी गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस बस्ती में 22 दिसंबर से ही मरीज सामने आने लगे थे। यहाँ रहने वाले ज्यादातर परिवार गरीब हैं। बीमार होने पर वे सरकारी डिस्पेंसरी भी जा रहे थे, लेकिन फील्ड टीम ने मुख्य स्वास्थ्य कार्यालय तक इसकी जानकारी नहीं पहुँचाई, जबकि बस्ती में आशा और ऊषा कार्यकर्तां तैनात हैं।

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बस्ती की केमिस्ट शॉप्स पर लगातार उल्टी-दस्त के मरीज दवाएँ लेने आ रहे थे और क्लिनिकों में भारी भीड़ लग रही थी, फिर भी विभाग मामले की गंभीरता को नहीं समझ सका। जब 28 दिसंबर को 18 मरीज दो निजी अस्पतालों में भर्ती हुए और उन्हें देखने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पहुँचे, तब इस बात का खुलासा हुआ कि बस्ती के लोग डायरिया और हैजे  के शिकार हुए हैं। 29 दिसंबर को जब पहली मौत हुई, तो स्वास्थ्य विभाग उसे 'दिल का दौरा' बताता रहा, लेकिन बाद में पुष्टि हुई कि मौत की वजह डायरिया ही थी।

रोज आ रहे थे 50 से ज्यादा मरीज

भागीरथपुरा में क्लिनिक संचालित करने वाले डॉ. विनोद पांडे ने बताया कि पिछले दस दिनों से मरीज आने लगे थे। वे उल्टी और दस्त की शिकायत लेकर आ रहे थे। यह बीमारी आमतौर पर दूषित पानी के सेवन से होती है। 25 दिसंबर के बाद तो मरीजों की संख्या प्रतिदिन 50 से ज्यादा होने लगी थी।

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बच्चे भी हो रहे बीमार। - फोटो : अमर उजाला

दस दिन में बिक गई गोलियां

बस्ती में केमिस्ट शॉप चलाने वाले आदर्श सिकरवार का कहना है कि आमतौर पर उल्टी-दस्त की जितनी गोलियाँ छह महीने में बिकती हैं, वे पिछले दस दिनों में ही बिक गईं। लोग लगातार पर्चियाँ लेकर आ रहे थे। जिन लोगों को जल्दी आराम नहीं मिला, वे अस्पतालों में भर्ती हुए।

उन्होंने बताया कि गोलियों की इतनी भारी माँग देखकर वे भी हैरान थे। हालांकि, पिछले एक-दो दिनों से दवा लेने आने वाले मरीजों की संख्या कम हुई है, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग ने अब बस्ती में ही दवाएँ मुहैया कराना शुरू कर दिया है। आपको बता दें कि अभी भी रोज नए मरीज सामने आ रहे हैं। अब तक दो मरीजों में हैजे की पुष्टि हो चुकी है और बस्ती में लगभग 354 मरीज डायरिया व अन्य बीमारियों से ग्रस्त हैं।

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