नए जूते पहनकर आए स्कूली बच्चे।
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इंदौर के महू के समीप ग्रामीण क्षेत्र पांजरिया के सरकारी स्कूल के ज्यादातर बच्चे नंगे पैर स्कूल आते थे। उनका गांव पहाड़ी वाले हिस्से पर है और स्कूल ढलान पर। चप्पल पहन कर उनके लिए पहाड़ी चढ़ाना-उतरना आसान नहीं रहता था और अच्छे जूते वे खरीद नहीं पाते थे।
इंदौर के पांच दोस्तों को यह बात पता चली तो उन्होंने बाल दिवस (14 नबंवर) को स्कूली बच्चों को अनूठा उपहार देने का फैसला लिया। स्टाॅफ की मदद से 70 से ज्यादा स्कूली बच्चों के पैरों के नाप मंगवाए और इंदौर से जूते और मौजे खरीदकर स्कूल में चुपचाप दे आए। ठंड के दिन शुरू होने से पहले नए जूते-मौजे पहनकर स्कूली बच्चे भी खुश नजर आए और बुधवार को मुस्कुराते हुए स्कूल पहुंचे।
इंदौर निवासी दीपक विभाकर नाईक अपने दोस्तों का एक वाट्सअप ग्रुप बना रखा है। उन्होंने दोस्तों के समूह का नाम विद्यामित्र दिया है। जब भी उन्हें स्कूली बच्चों के अभाव के बारे में पता चलता है तो फिर मदद कर देते है। कुछ दिनों पहले उन्हें पांजरिया गांव के स्कूल के बच्चों के नंगे पैर स्कूल आने के बारे में पता चला तो उन्होंने अपने वाट्सअप ग्रुप पर इसे शेयर किया।
थोड़ी ही देर में उनके दोस्त दीप मंदवानी, मनोज झिरीवाला, स्मिता मुकादम, बलराम हुंदलानी, फिरोज बड़नगर वाला स्कूली बच्चों को जूते दिलाने के लिए तैयार हो गए और फिर बाल दिवस से पहले बच्चों के पास उनका उपहार पहुंच गया। बुधवार को स्कूली बच्चे नए जूते पहनकर स्कूल आए।