शहर में लगातार सड़कों पर गहरे गड्ढे होने और सड़क धंसने के मामले सामने आ रहे हैं। कुछ दिनों पहले पंढ़रीनाथ क्षेत्र में सड़क धंस गई थी। सोमवार को बॉम्बे अस्पताल क्षेत्र की एक गली में उस वक्त सड़क धंस गई, जब वहां से पानी का टैंकर गुजर रहा था। टैंकर का पहिया गड्ढे में फंस गया। इसके बाद क्रेन की मदद से टैंकर को बाहर निकाला गया। सड़क के जिस हिस्से में गड्ढा हुआ, उसके पास ही एक चैंबर था। अब अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि गड्ढा किन कारणों से हुआ।
बता दें, इंदौर में सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत कई जगहों पर लाइनें डाली गईं और चैंबर बनाए गए, लेकिन इनके निर्माण के दौरान अधिकारियों ने गुणवत्ता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। शहरभर में जगह जगह चैंबर धंस रहे हैं। चैंबरों में लीकेज के कारण आसपास की मिट्टी धंसने लगती है और इसके बाद सड़कें भी धंसने लगती हैं। शहर की कई सड़कों पर इस तरह की समस्या सामने आई है। बॉम्बे अस्पताल क्षेत्र में जिस जगह गड्ढा हुआ, वहां भी पास में चैंबर था।
कई जगह सड़कें धंसीं
अब तक शहर में कई स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। राजवाड़ा क्षेत्र में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनी सड़क के नीचे करीब तीन महीने पहले नर्मदा लाइन को भरकर चार्ज किया गया था। इस दौरान लाइन फूट गई और सड़क धंस गई। इसके अलावा रावजी बाजार, मेघदूत गार्डन रोड और पंढ़रीनाथ क्षेत्र में भी सड़क पर गड्ढे होने के मामले सामने आ चुके हैं। रावजी बाजार क्षेत्र में गड्ढे की गहराई 15 फीट से अधिक थी।
शास्त्री ब्रिज पर भी हुआ था गड्ढा
इसके अलावा व्यस्त शास्त्री ब्रिज पर भी गड्ढा हो गया था। इसके बाद ब्रिज के आसपास चूहों के बिलों को बंद किया गया था। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि सड़कों के धंसने के कारणों की जांच के साथ ही भूमिगत पाइपलाइन, सीवरेज चैंबर और सड़क निर्माण की गुणवत्ता की भी गंभीरता से जांच करने की जरूरत है।