पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों से मेट्रो को बाहर करने और अंडरग्राउंड मेट्रो न बनाने की मांग को लेकर रीगल तिराहे पर प्रदर्शन किया गया। जनहित पर्यावरण मंच और स्थानीय रहवासियों ने भूजल व पर्यावरण नुकसान की आशंका जताई है।
शहर के पुराने और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में प्रस्तावित मेट्रो परियोजना को लेकर विरोध के सुर तेज होने लगे हैं। इस क्रम में शुक्रवार सुबह रीगल तिराहे पर जनहित पर्यावरण मंच समेत विभिन्न संगठनों और स्थानीय नागरिकों द्वारा जोरदार प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने पुराने इलाकों से मेट्रो को बाहर रखने और भूमिगत निर्माण न कराने की मांग उठाई है।
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रीगल तिराहे पर हुआ जोरदार प्रदर्शन
शुक्रवार सुबह लगभग 9.30 बजे रीगल तिराहे पर जनहित पर्यावरण मंच के बैनर तले लोग एकत्रित हुए। इस प्रदर्शन में तिलक नगर और मल्हारगंज क्षेत्र के उन रहवासियों ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया, जिनके मकानों के नीचे से मेट्रो का मार्ग प्रस्तावित किया गया है। लगभग 1 घंटे तक चले इस प्रदर्शन में लोगों ने अपनी चिंताओं को सामने रखा और शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।
अलग-अलग मांगों को लेकर एकजुट हुए संगठन और रहवासी
प्रदर्शन के दौरान दो मुख्य बिंदु सामने आए। एक तरफ जनहित पर्यावरण मंच का मानना है कि मेट्रो रेल सेवा को शहरी सीमा से बाहर रखा जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर तिलक नगर और मल्हारगंज के निवासियों का मुख्य विरोध मेट्रो को अंडरग्राउंड यानी भूमिगत बनाए जाने को लेकर है। रहवासियों का कहना है कि वे मेट्रो के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसे जमीन के नीचे से ले जाना किसी भी तरह से उचित नहीं है।
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यात्रियों की कम संख्या और भारी बजट पर उठे सवाल
जनहित पर्यावरण मंच के प्रतिनिधि डॉ. सुभाष बारोड़ ने कहा कि देश के जिन शहरों में वर्तमान में मेट्रो का संचालन हो रहा है, वहां भी यात्रियों की संख्या तय अपेक्षाओं के अनुसार नहीं मिल पा रही है। ऐसे स्थिति में भारी-भरकम राशि खर्च करके पुराने शहर के घने इलाकों में मेट्रो परियोजना लाना और वहां अनावश्यक अव्यवस्थाएं उत्पन्न करना समझदारी से परे है।
पर्यावरण और भूजल स्तर को नुकसान पहुंचने की आशंका
तिलक नगर निवासी मनीष जैन ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि मेट्रो का निर्माण अनिवार्य है, तो भी इसे अंडरग्राउंड बनाने की गलती नहीं की जानी चाहिए। जमीन के भीतर गहराई तक खुदाई और निर्माण कार्य होने से भूमिगत जल संरचनाओं पर बुरा असर पड़ेगा और स्थानीय पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने की पूरी आशंका है। प्रदर्शनकारियों ने अंत में मांग की कि मेट्रो का नया रूट तय करते समय रहवासियों की सुरक्षा, चिंताओं और पर्यावरणीय पहलुओं का विशेष ध्यान रखा जाए।