साहित्यिक चोरी तब मानी जाती है जब हम किसी के द्वारा लिखे गए साहित्य को बिना उसका सन्दर्भ दिए अपने नाम से प्रकाशित कर लेते हैं। इस प्रकार से लिया गया साहित्य अनैतिक माना जाता है और इसे साहित्यिक चोरी कहा जाता है।
इंदौर में साहित्यिक चोरी रोकथाम विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें अंतरराष्ट्रीय वक्ता बौद्धिक संपदा अधिकार तथा साहित्यिक चोरी रोकथाम में विशेषज्ञ नई दिल्ली की डॉ. प्रिया राय ने शिक्षकों और छात्रों को संबोधित किया।
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सेमिनार की शुरुआत में इंडेक्स मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. जीएस पटेल ने बौद्धिक संपदा और अधिकारों और साहित्यिक चोरी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मुख्य वक्ता डॉ. प्रिया राय का परिचय दिया। डॉ. राय ने बताया कि साहित्यिक चोरी तब मानी जाती है जब हम किसी के द्वारा लिखे गए साहित्य को बिना उसका सन्दर्भ दिए अपने नाम से प्रकाशित कर लेते हैं। इस प्रकार से लिया गया साहित्य अनैतिक माना जाता है और इसे साहित्यिक चोरी कहा जाता है। साहित्यिक चोरी आमतौर पर कई ऐसे कानून है, जिनका उल्लघंन किया जा रहा है। शिक्षक और छात्रों को इनके कानूनी पहलुओं को समझने की जरूरत है। प्रतिभागियों को उन्होंने शैक्षणिक कार्य में साहित्यिक चोरी की पहचान करने और उससे बचने के उपायों के बारे में जानकारी दी।