मप्र सरकार द्वारा जारी बजट 2026 पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बजट में शिक्षा, रोजगार, व्यापार के लिए भी बहुत कुछ मिला है। इसी विषय पर एमबीए विद्यार्थियों के साथ एक विशेष चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इंदौर स्थित श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस (SVIMS) में आयोजित इस सत्र में सभी ने खुलकर अपनी प्रतिक्रियाएं दी। सत्र का प्राथमिक उद्देश्य छात्रों को बजट की प्रमुख घोषणाओं, सरकारी आर्थिक नीतियों और उनके उद्योग, स्टार्टअप एवं रोजगार क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों से विस्तार से अवगत कराना था। छात्रों का मानना है कि बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह भविष्य की व्यावसायिक रणनीतियों का आधार होता है। इस विशेष सत्र में राचि मित्तल, राजशुभम गहलोत, प्रियांशी बैरागी, राधिका पाटीदार, प्रियल श्रीपाल, सानिया फातिमा, स्वाति मित्तल, श्वेता अवधिया, सेजल छेरिया, रिया पाटनी, संजना चौधरी, राघव सुहाने, शाही जोशी, शरण जैन, दिव्या जैन, आयुष कुमार धनुक, देवांश शर्मा और प्रशांत द्विवेदी शामिल हुए। एसोसिएट प्रोफेसर डाक्टर रेखा मेलवानी और सीए जीनल शाह ने सत्र का संचालन किया।
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प्रमुख आर्थिक बिंदुओं पर विस्तृत संवाद हुआ
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के अनुभवी प्राध्यापकों ने बजट के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। चर्चा में विशेष रूप से कर संरचना में हुए हालिया बदलावों, एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को मिलने वाले प्रोत्साहन और स्टार्टअप ईकोसिस्टम के लिए घोषित नई नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके अतिरिक्त, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, शिक्षा क्षेत्र में निवेश और कौशल विकास (Skill Development) के लिए सरकार द्वारा किए गए वित्तीय प्रावधानों पर भी विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। प्राध्यापकों ने बताया कि किस प्रकार यह बजट मप्र की दीर्घकालीन विकास यात्रा को नई गति प्रदान करेगा।
विद्यार्थियों की सहभागिता और भविष्य की चुनौतियां
सत्र की विशेषता विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। एमबीए के छात्रों ने न केवल विशेषज्ञों के विचारों को सुना, बल्कि बजट के विभिन्न आयामों पर अपने मौलिक प्रश्न और विचार भी साझा किए। चर्चा के दौरान इस बात पर मंथन किया गया कि किस प्रकार सरकारी नीतियां वर्तमान उद्यमिता के माहौल, कॉर्पोरेट रणनीतियों और विदेशी निवेश (FDI) के प्रवाह को प्रभावित करती हैं। इस प्रकार के अकादमिक संवाद से विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान में वृद्धि हुई और उनमें विश्लेषणात्मक सोच तथा नेतृत्व क्षमता जैसे गुणों का विकास हुआ। विद्यार्थियों ने भविष्य के बाजार और रोजगार की संभावनाओं को बजट की दृष्टि से परखने का प्रयास किया।