जलकुंभी को मशीनों से साफ करते निगम कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
तालाब का एक-तिहाई से अधिक भाग ढक चुका
एन्वायरमेंट प्लानिंग एंड कोआर्डिनेशन आर्गेनाइजेशन के अधिकारियों ने नगर निगम को इस संबंध में निर्देश दिए थे, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तालाब में मिलने वाले दूषित जल को नहीं रोका गया, तो इसका बुरा प्रभाव पूरे शहर के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ेगा। हैरानी की बात यह है कि सिरपुर में जलकुंभी हटाने वाली मशीन उपलब्ध है, इसके बावजूद निगम प्रशासन सफाई नहीं कर पा रहा है। इस सुस्त रवैये के कारण तालाब का एक-तिहाई से अधिक भाग पूरी तरह ढक चुका है।
रामसर सूची से बाहर होने का डर
द नेचर वालेंटियर्स के अध्यक्ष और पद्मश्री भालू मोंढ़े के अनुसार, अधिकारियों से बार-बार संवाद करने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने चिंता जताई कि पक्षी यहां के प्राकृतिक वास के कारण ही आते हैं, और यदि तालाब का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ा तो वे यहां आना बंद कर देंगे। इससे न केवल प्रकृति का चक्र प्रभावित होगा, बल्कि सिरपुर तालाब का नाम रामसर साइट की प्रतिष्ठित सूची से भी हटाया जा सकता है। वर्तमान में निगम के पास जलकुंभी हटाने की समय सीमा को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
अतिक्रमण और प्रदूषण से घटती पक्षियों की संख्या
तालाब के कैचमेंट एरिया और ग्रीन बेल्ट की जमीन पर अवैध कॉलोनाइजरों की नजर है। नगर निगम और जिला प्रशासन ने कुछ सख्त कदम उठाए हैं, लेकिन अतिक्रमण अब भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने की मुहिम शुरू तो हुई है, मगर अवैध बसाहट और दूषित पानी के कारण पिछले तीन वर्षों में प्रवासी पक्षियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ठंड के मौसम में आने वाले इन मेहमान पक्षियों को बचाने के लिए किनारों को खाली कराना और पानी को शुद्ध रखना अनिवार्य हो गया है।