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Indore News: रेलवे स्टेशन पर कचरे का पहाड़, ट्रेनों के आसपास भरा सीवरेज, यात्री परेशान

Wed, 24 Jun 2026 06:06 AM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर/इंदौर

सार

इंदौर रेलवे स्टेशन के कोचिंग डिपो में बरसों से जमा कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है। मानसून से पहले रेलवे ने सफाई अभियान चलाकर सैकड़ों टन पुराना कचरा हटाया है, लेकिन रोजाना निकलने वाले नए कचरे के निपटान की व्यवस्था अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
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चारों तरफ पसरी हुई है गंदगी। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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इंदौर रेलवे स्टेशन के कोचिंग डिपो परिसर में बरसों पुराने कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है। मानसून दस्तक देने वाला है, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही। तेज बारिश की स्थिति में डिपो में जमा यह कचरा और बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है। इससे न केवल आसपास गंदगी फैलेगी, बल्कि बाद में सफाई करना भी रेलवे के लिए चुनौती बन जाएगा।
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दूसरी ओर ट्रेनों और रेलवे परिसर के आसपास सीवरेज और गंदगी की स्थिति ऐसी है कि यात्री स्टेशन पहुंचते ही परेशान हो जाते हैं। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के रेलवे स्टेशन पर इन दिनों जगह-जगह गंदगी दिखाई दे रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। वहीं सिंहस्थ 2028 को लेकर रेलवे बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन मौजूदा हालात बता रहे हैं कि स्टेशन की साफ-सफाई को लेकर गंभीरता की कमी है।

कचरे के निपटान के लिए एजेंसी नहीं मिली

रेलवे ने करीब एक महीने पहले यहां सफाई अभियान शुरू किया था। इस अभियान के तहत अब तक सैकड़ों टन कचरा हटाया जा चुका है। इसके बावजूद रोजाना ट्रेनों, विभिन्न प्लेटफॉर्मों और स्टेशन परिसर से निकलने वाला नया कचरा फिर उसी स्थान पर जमा होने लगा है। इस स्थिति की मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि रेलवे ने पुराने कचरे के निपटान की व्यवस्था तो कर दी, लेकिन रोज निकलने वाले नए कचरे के नियमित निपटान के लिए जिम्मेदार अनुबंधित एजेंसी ने अब तक काम शुरू नहीं किया है। इसके चलते कोचिंग डिपो में एक बार फिर कचरे का नया ढेर बनने का खतरा मंडरा रहा है।
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प्रशासनिक अनदेखी से प्लांट के बाहर बना डंपिंग ग्राउंड

लंबे समय से रेलवे स्टेशन के सभी छह प्लेटफॉर्म, मुख्य स्टेशन परिसर और लंबी दूरी की ट्रेनों से सफाई के दौरान निकलने वाला कचरा कोचिंग डिपो स्थित सेग्रिगेशन प्लांट के बाहर डंप किया जा रहा था। रेलवे अधिकारियों की अनदेखी के कारण यह समस्या लगातार बढ़ती गई और स्टेशन के एक हिस्से की स्थिति बदतर हो गई। करीब एक महीने पहले मामला प्रशासनिक स्तर पर पहुंचने के बाद रेलवे हरकत में आया। इसके बाद नगर निगम के सहयोग से प्रतिदिन कचरा उठाने की अंतरिम व्यवस्था की गई और कोटेशन प्रक्रिया के तहत ग्वालियर क्षेत्र के एक नए ठेकेदार को प्लांट के भीतर और बाहर जमा पुराने कचरे को हटाने का जिम्मा सौंपा गया।

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पुराने कचरे की सफाई जारी, नए कचरे की व्यवस्था नहीं

इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक तरफ पुराने कचरे को हटाने का काम जारी है, जबकि दूसरी तरफ रोजाना निकलने वाले नए कचरे के वैज्ञानिक निपटान की व्यवस्था अब भी अधूरी है। कोटेशन के आधार पर काम कर रहे अस्थायी ठेकेदार के कर्मचारियों का कहना है कि उनके अनुबंध के अनुसार उनकी जिम्मेदारी केवल पहले से जमा पुराने कचरे को हटाने की है। वर्तमान में स्टेशन से निकलने वाले नए कचरे को उठाने की जिम्मेदारी उस मुख्य एजेंसी की है, जिसे रेलवे ने नियमित कचरा प्रबंधन का ठेका दिया है। कोचिंग डिपो में तैनात रेलवे कर्मचारियों का भी मानना है कि यदि नए कचरे का समय रहते निपटान शुरू नहीं हुआ तो कुछ ही दिनों में यहां फिर से पुराने जैसी स्थिति बन जाएगी।
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जल्द हटवाया जाएगा कचरा

रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने कहा कि नई एजेंसी का चयन अंतिम रूप से हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि रेलवे जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान कर व्यवस्था को बेहतर बनाएगा। इसके लिए अधिकारियों के साथ लगातार चर्चा की जा रही है।
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