उज्जैन के ऋषियों द्वारा बनाए गए फार्मूलों को पहले अरब देशों ने सीखा वहां से यह फार्मूले यूरोप गए और धीरे धीरे पूरी दुनिया में फैलते गए। हमारा अंकशास्त्र हो या मेडिकल साइंस, पूरी दुनिया ने इसे सीखा और अपनी सभ्यताओं को समृद्ध बनाया। आज हम सभी को यह जानना चाहिए कि भारत की वैज्ञानिक परंपरा कितनी समृद्ध थी। यह बातें प्रो. डॉ. शेखर सी. मांडे ने इंदौर के एसजीएसआईटीएस में आयोजित व्याख्या में कही। उन्होंने बताया कि जब पूरी दुनिया में टीकाकरण पर बात चल रही थी और दुनिया का पहला टीकाकरण शुरू होने वाला था उससे 30 साल पहले ही भारत में टीकाकरण हो रहा था। इसकी पूरी जानकारी आज भी इतिहास की किताबों में दर्ज है।
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विज्ञान भारती (विभा) मालवा प्रांत एवं इंदौर महानगर इकाई द्वारा आयोजित मासिक संवाद श्रृंखला "विज्ञान विमर्श" के आठवें संस्करण के तहत यह आयोजन हुआ। देश के प्रख्यात वैज्ञानिक, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) के अध्यक्ष एवं विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. शेखर सी. मांडे ने यहां पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन के बाद में प्रश्न उत्तर भी लिए और कार्यक्रम में मौजूद सदस्यों की जिज्ञासाएं शांत की।
कार्यक्रम का विषय "Rich Scientific Legacy of Bharat – भारत की समृद्ध वैज्ञानिक परंपरा" रखा गया था। अपने व्याख्यान में प्रो. मांडे ने भारत की प्राचीन वैज्ञानिक उपलब्धियों, भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान में भारत के योगदान तथा भविष्य के वैज्ञानिक भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। व्याख्यान में विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विज्ञान प्रेमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थी विज्ञान मंथन (VVM) के संबंध में विशेष जागरूकता एवं अभिमुखीकरण सत्र भी आयोजित किया गया।
इस अवसर पर एसजीएसआईटीएस, इंदौर के संचालक एवं विज्ञान भारती, मालवा प्रांत के अध्यक्ष प्रो. नीतेश पुरोहित ने कहा "भारत की वैज्ञानिक परंपरा हजारों वर्षों से ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की सुदृढ़ आधारशिला रही है। आज आवश्यकता है कि हमारी युवा पीढ़ी आधुनिक विज्ञान के साथ-साथ भारतीय वैज्ञानिक विरासत को भी समझे और उससे प्रेरणा लेकर वैश्विक चुनौतियों के समाधान विकसित करे। प्रो. डॉ. शेखर सी. मांडे जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिक का एसजीएसआईटीएस आगमन विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और विज्ञान प्रेमियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी अवसर है। साथ ही विद्यार्थी विज्ञान मंथन के माध्यम से विद्यालय स्तर पर वैज्ञानिक प्रतिभाओं को पहचानने एवं उन्हें राष्ट्रीय मंच प्रदान करने की दिशा में भी यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण रहा।"