विश्व मंगल सभा की सूरज डामोर व नलिनी चौखंडे ने बताया कि अभी तक नाटक के माध्यम से 60 हजार से ज्यादा लोग देवी अहिल्या बाई के जीवन को जान चुके है। उन्होंने किस तरह सेवा कार्य किए। कितने सफल तरीके से शासन चलाया इस सब बातों उल्लेख किया गया है।
देवी अहिल्या बाई की 300 वीं जयंती 31 मई को मनाई जाएगी। प्रदेश सरकार ने इसे बड़े पैमाने पर बनाने का फैसला लिया है। इंदौर और उज्जैन में दो बड़े आयोजन होना है। जिसमें देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मूर्मू शामिल होंगी। इसके अलावा देश और प्रदेश के कई शहरों में देवी अहिल्या पर आधारित नाटकों का मंचन भी कलाकारों द्वारा किया जा रहा है। विश्व मंगल सभा द्वारा प्रदेश के 15 शहरों में देवी अहिल्या के नाटक का मंचन हो रहा है। महेश्वर में यह नाटक काफी सफल रहा और दर्शक नाटक को देखकर भाव विभोर हो गए थे।
नाटक में नागपुर के कलाकारों ने देवी अहिल्या के काल को बखूबी मंच पर उतारा। विश्व मंगल सभा की सूरज डामोर व नलिनी चौखंडे ने बताया कि अभी तक नाटक के माध्यम से 60 हजार से ज्यादा लोग देवी अहिल्या बाई के जीवन को जान चुके है। उन्होंने किस तरह सेवा कार्य किए। कितने सफल तरीके से शासन चलाया और दुश्मनों को भी कूटनीतिक तरीके से हराया। इस सब बातों उल्लेख किया गया है।
महेश्वर में बनेगा हैंडलूम विलेज
महेश्वर में अहिल्या लोक बनाने की योजना सरकार ने तैयार की है। उज्जैन में सिंहस्थ मेले को लेकर आयोजित बैठक में अहिल्या लोक पर भी चर्चा हुई। अफसरों को कहा गया है कि महेश्वर के अलावा मंडलेश्वर व आसपास के गांवों में पर्यटन की संभावनाएं है। महेश्वर में किले के अलावा देवी अहिल्या बाई के जीवन पर आधारित एक संग्रहालय बनाया जाए। इसके अलावा चंदेरी की तरह महेश्वर में भी हैंडलूम विलेज बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई है,क्योकि महेश्वर की माहेश्वरी साड़ी भी देशभर में प्रसिद्ध है।