शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से नगर निगम और प्रशासन ने करोड़ों रुपए खर्च कर मल्टीलेवल और मैकेनाइज्ड पार्किंग का निर्माण कराया, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन पार्किंग का उपयोग न के बराबर हो रहा है। हालत यह है कि पार्किंग खाली रहती हैं और आसपास की सड़कें दोपहिया और चारपहिया वाहनों से भरी रहती हैं।
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24 में से 7 मल्टीलेवल पार्किंग खाली
नगर निगम के पास शहर में कुल 24 पार्किंग हैं, जिनमें आठ मल्टीलेवल, 15 ऑफ स्ट्रीट और एक बेसमेंट पार्किंग शामिल है। इन सभी पार्किंग में कुल 2277 चारपहिया और 5184 दोपहिया वाहन खड़े करने की क्षमता है। बावजूद इसके सात मल्टीलेवल पार्किंग लगभग पूरी तरह खाली रहती हैं। सुभाष चौक की पार्किंग को छोड़ दिया जाए तो बाकी ज्यादातर पार्किंग में गाड़ियां नजर नहीं आतीं।
महाराजा कॉम्प्लेक्स की बेसमेंट पार्किंग बेकार
महारानी रोड स्थित महाराजा कॉम्प्लेक्स की बेसमेंट पार्किंग बारिश के दौरान पानी भरने के कारण अनुपयोगी हो चुकी है। यहां मुश्किल से पांच से सात वाहन ही खड़े हो पाते हैं। वहीं एमजी रोड पर जिला कोर्ट के सामने बनी दो मंजिला पार्किंग में भी आठ से दस वाहन ही नजर आते हैं।
बाजार क्षेत्रों की पार्किंग भी खाली
शिवाजी मार्केट, खजूरी बाजार, सत्य साईं स्कूल, प्रेस क्लब और प्रेमसुख सिनेमा क्षेत्र की मल्टीलेवल पार्किंग भी अधिकतर समय खाली रहती हैं। इसके उलट, इन पार्किंग के आसपास की सड़कें अवैध और बेतरतीब पार्किंग से जाम रहती हैं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।
डिजाइन और सिस्टम बड़ी समस्या
इंजीनियर अतुल सेठ के अनुसार शहर की अधिकांश मल्टीलेवल पार्किंग पुराने डिजाइन पर बनाई गई हैं। एंट्री और एग्जिट सिस्टम जटिल होने से लोग वाहन अंदर ले जाने से कतराते हैं। कई जगह रैंप संकरे हैं और जिन पार्किंग में लिफ्ट या ऑटोमैटिक सिस्टम है, वे अक्सर खराब रहते हैं। ऐसे में लोग सड़क किनारे वाहन खड़ा करना ज्यादा आसान समझते हैं।
सड़क किनारे पार्किंग से बढ़ रहा जाम
ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सड़क किनारे वाहन खड़े होना शहर में जाम की बड़ी वजह है। भीड़भाड़ वाले बाजारों और प्रमुख चौराहों पर खड़े वाहन ट्रैफिक को बाधित करते हैं। व्यापारी भी अपनी दुकानों के सामने वाहन खड़े कर लेते हैं, जिससे ग्राहक भी सड़क पर ही पार्किंग करने लगते हैं।
समाधान के लिए सख्ती और सुधार जरूरी
आर्किटेक्ट और प्रशासनिक मामलों के सलाहकार अतुल सेठ का मानना है कि नगर निगम को पार्किंग की डिजाइन और उपयोगिता पर फिर से काम करना होगा। इसके साथ ही सड़क किनारे पार्किंग पर सख्त चालानी कार्रवाई जरूरी है। जब तक पार्किंग को सुविधाजनक नहीं बनाया जाएगा और नियमों का पालन सख्ती से नहीं कराया जाएगा, तब तक शहर को जाम से राहत नहीं मिल सकेगी।