मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा रविवार को सहायक प्राध्यापक परीक्षा-2024 का आयोजन किया गया। इस परीक्षा में बड़ी संख्या में महिला अभ्यर्थियों ने भाग लिया, लेकिन उन्हें परीक्षा केंद्र पर नाक की लोंग, कान की बाली और गले में पहने चेन-मंगलसूत्र तक निकालने के लिए कहा गया, जिससे अभ्यर्थियों ने इसका विरोध किया। हालांकि, आयोग के ओएसडी आर. पंचभाई ने कहा कि इस तरह के कोई निर्देश नहीं दिए गए थे और मामला उनकी जानकारी में आया है, जिसमें संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी। परीक्षा प्रदेश के चार प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में आयोजित की गई। इंदौर में सबसे अधिक 85 सेंटर बनाए गए थे, जहां 31,839 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी।
सेंटर के बाहर अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की भीड़
इंदौर में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा देने के लिए पहुंचे थे। इसके अलावा, अभ्यर्थियों के परिजन भी परीक्षा सेंटर के बाहर उनके इंतजार में बैठे थे। राजमोहल्ला स्थित क्लॉथ मार्केट वैष्णव बाल मंदिर गर्ल्स स्कूल परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों के रोल नंबर और दस्तावेज़ चेक किए गए। इसके अलावा महिला अभ्यर्थियों से उनके गहनों को निकालवाने की घटना सामने आई। परीक्षा दो सत्रों में आयोजित की गई थी और आयोग ने सेंटरों पर इमरजेंसी जनरेटर और बल्ब की व्यवस्था की थी ताकि बिजली जाने की स्थिति में कोई परेशानी न हो। कुल मिलाकर प्रदेशभर में 117 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जिसमें इंदौर में 85 और भोपाल, ग्वालियर तथा जबलपुर में अन्य सेंटर थे।
परीक्षा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा परीक्षा केंद्रों में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10 संभागीय पर्यवेक्षकों और 10 विशेष पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई थी। अभ्यर्थियों को परीक्षा में सम्मिलित होने से पहले प्रवेश पत्र और फोटो आईडी कार्ड साथ लाने के निर्देश दिए गए थे। जिन अभ्यर्थियों के पास प्रवेश पत्र नहीं था, उनके रोल नंबर लिस्ट के आधार पर पहचान की गई और प्रपत्र-6 भरवाकर एंट्री दी गई। पहला सत्र सुबह 10 से 11 बजे तक था और दूसरा सत्र 1 से 4 बजे तक चला। परीक्षा केंद्रों पर समय पर प्रश्नपत्र पुस्तिका भी वितरित की गई।
दिव्यांग अभ्यर्थियों को मिला अतिरिक्त समय
दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा केंद्रों पर विशेष व्यवस्था की गई थी। ओएसडी आर. पंचभाई के अनुसार, जो अभ्यर्थी सह लेखकों के साथ परीक्षा देने आए थे, उन्हें अतिरिक्त समय दिया गया। एक घंटे की परीक्षा में उन्हें 20 मिनट और तीन घंटे की परीक्षा में 60 मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया। सहलेखक की योग्यता एक क्लास कम होने चाहिए और यह व्यवस्था दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए विशेष रूप से बनाई गई थी, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो।