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आलीराजपुर धमकी प्रकरण: सीईओ को धमकी देने वाले भाई से मंत्री नागरसिंह ने झाड़ा पल्ला, बोले- मेरी बातचीत बंद है

Sat, 25 Apr 2026 03:47 PM IST
धार ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीराजपुर/इंदौर/धार

सार

आलीराजपुर में जिला पंचायत सीईओ के साथ बदसलूकी और धमकी मामले में आरोपी भाई से मंत्री नागर सिंह चौहान ने अपना पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि उनका भाई अलग रहता है और बातचीत भी बंद है। पढ़ें पूरी खबर। 
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आरोपी और पीड़ित सीईओ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भाजपा सरकार के मंत्रियों से ज्यादा उनके परिजनों के आए दिन विवाद सामने आ रहे हैं। ताजा मामला आलीराजपुर जिले से सामने आया है। कैबिनेट मंत्री नागरसिंह चौहान के भाई ने एक महिला अधिकारी से अभद्रता करते हुए जान से मारने की धमकी दी है। आरोपी इंदर सिंह चौहान की पत्नी जनपद पंचायत की अध्यक्ष है। प्रतिनिधि के रूप में इंदरसिंह चौहान जनपद कार्यालय पहुंचे, जहां कन्या विवाह योजना के पंजीयन आवेदन निरस्त होने की बात पर वह नाराज हो गए।

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क्या कहा था मंत्री के भाई ने?
प्रतिनिधि इंदरसिंह चौहान पर आरोप है कि वह महिला अधिकारी को मारने दौड़े और धमकाते हुए कहा कि “तेरे दांत तोड़ दूंगा, तुझे यहीं ज़िंदा ज़मीन के अंदर गाड़ दूंगा।” हालांकि, कार्यालय में मौजूद कर्मचारी सावन भिड़े ने इंदरसिंह को रोका और बीच-बचाव कर मामला शांत करने की कोशिश की। इधर, महिला अधिकारी की सूचना पर पुलिस ने मंत्री के भाई पर बीएनएस की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। वहीं, कैबिनेट मंत्री चौहान ने पूरे मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनका भाई अलग रहता है, अपना काम खुद करता है। उनकी उससे बातचीत बंद है, कानून अपना काम करे।

जानें कब और कैसे मामले ने पकड़ा तूल
दरअसल, पूरा मामला जनपद पंचायत कार्यालय से जुड़ा हुआ है। घटना 22 अप्रैल को दोपहर के समय की है, जब महिला सीईओ प्रिया काग कार्यालय पहुंची थीं। इसी दौरान आरोपी इंदर सिंह चौहान ने उन्हें धमकाया और जान से मारने की धमकी दी। बताया जा रहा है कि कन्या विवाह योजना में पहले से विवाहित आवेदकों के आवेदन निरस्त किए जाने को लेकर इंदरसिंह चौहान नाराज हो गए। जबकि विभागीय कर्मचारियों के अनुसार पहले से हो चुके विवाह का पुनः आवेदन नहीं लिया जा सकता, इसलिए नियम के अनुसार ही आवेदन निरस्त किए गए थे। वहीं, जनपद प्रतिनिधि चौहान इन आवेदकों को भी शासकीय योजना का लाभ गलत तरीके से दिलवाने की कोशिश कर रहे थे।

खुद प्रिया काग ने क्या बोला?
मामले में जनपद पंचायत सीईओ ने कहा कि कन्या विवाह योजना के आवेदन निरस्त करने पर उन्हें धमकाया गया है। उन्होंने बताया कि दोपहर के समय कार्यालय पहुंचने पर उन्होंने कहा कि तेरे दांत तोड़ दूंगा, जिंदा गाड़ दूंगा। साथ ही रास्ता रोकते हुए मुझे मारने दौड़े। उन्होंने कहा कि महिला होने के बावजूद कार्यालय में इस तरह धमकाना गलत है, जनप्रतिनिधियों को ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। अब वह अपने ही कार्यालय में असुरक्षित महसूस कर रही हैं। 

विवादों से पुराना नाता
कैबिनेट मंत्री चौहान की पत्नी क्षेत्र से सांसद हैं। राजनीतिक रसूख का फायदा उठाने की कोशिश इंदरसिंह चौहान ने की। इंदरसिंह पहले भी विवादों में रहे हैं। खाद वितरण को लेकर विपणन सहकारी संस्था के सेल्समैन से मारपीट का मामला सामने आ चुका है। कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे हटवाने को लेकर भी सवाल उठे हैं। इस मामले ने सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के परिजनों की दबंगई को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। 

पढ़ें:  'तुम्हारे दांत तोड़ दूंगा', CEO ने जिला पंचायत अध्यक्ष पति पर लगाया धमकाने का आरोप; भाजपा नेता पर केस दर्ज

कौन हैं मंत्री नागरसिंह चौहान?
नागर सिंह चौहान का एमपी की राजनीति में अच्छा प्रभाव है। वह अलीराजपुर विधानसभा सीट से चार बार के विधायक भी रहे हैं। सबसे पहली बार वह साल 2003 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे और कांग्रेस के उम्मीदवार को करारी शिकस्त दी थी। वहीं, साल 2008 में दूसरी बार इलेक्शन में बीजेपी के उम्मीदवार बने और कांग्रेस के प्रत्याशी महेश पटेल को 3224 वोटों से करारी शिकस्त दी। साल 2013 में चौहान तीसरी बार मैदान में उतरे और कांग्रेस के प्रत्याशी को हराया। 2018 में बीजेपी के टिकट पर उतरे नागर को करारी हार का मुंह देखना पड़ा। इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार मुकेश पटेल ने जीत हासिल की। 2023 में पांचवी बार विधानसभा चुनाव लड़े नागर को फिर से जीत हासिल हुई।

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इस्तीफे की दे चुके हैं धमकी
दो साल पहले ही मोहन यादव की सरकार में कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान वन विभाग छीने जाने के बाद नाराज हो गए थे। उन्होंने बगावती रुख अपना लिया था। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि अगर मेरी बात को अनसुना किया गया तो झाबुआ-रतलाम संसदीय सीट से सांसद अनीता नागर सिंह चौहान भी अपने पद से इस्तीफा दे देंगी।नागर सिंह चौहान ने कहा था कि मैं आदिवासी हितों की रक्षा नहीं कर पा रहा हूं, इसलिए इस्तीफा दे दूंगा। हालांकि, इसके तुरंत बाद में उन्होंने कहा कि अभी इस्तीफे का मामला होल्ड पर है। वे पहले भोपाल में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे। अगर उनकी बात नहीं सुनी जाती है तो वह इस्तीफा दे सकते हैं।
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