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Indore News: महू के भेरूसिंह को पद्मश्री, 9 साल की उम्र से भजन गा रहे, कबीर वाणी जन जन तक पहुंचाई

Sat, 25 Jan 2025 09:49 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

सार

Padma shri award 2025: पिता के साथ सीखा गायन, गांव गांव जाते और लोगों को भक्ति से जोड़ते। 45 साल से निरंतर कार्यक्रम कर रहे हैं। 
 
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भेरूसिंह चौहान - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
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कबीर की वाणी जन जन तक पहुंचाने वाले महू के मालवी लोकगायक भेरूसिंह चौहान को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है। 27 जुलाई 1961 को जन्मे भेरूसिंह ने मालवा को नई पहचान दिलाई। बाबा साहब अंबेडकर की जन्मस्थली से आने वाले भेरूसिंह ने कहा कि कबीर ने ईश्वर, आनंद, फकीरी और रईसी सब की व्याख्या अपने पदों में की है। उनकी हर बात आज भी प्रासंगिक है। मैं कबीर वाणी इसलिए सुनाता हूं ताकि लोग आज के परिदृश्य में ईश्वर की प्राप्ति का सही मार्ग जानें। आज हम चकाचौंध की तरफ भाग रहे हैं लेकिन खुशी तो ईश्वर की भक्ति में ही है। 
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9 साल की उम्र में गाने लगे थे भजन
भेरुसिंह चौहान अपनी 9 वर्ष की अवस्था से ही पारम्परिक मालवी लोक शैली में भजन गायन आदि से जुड़ गए। मालवा क्षेत्र की भक्ति संगीत मंडलियों के साथ वे गांव-गांव जाते और लोक गायन करते। इसमें वे संत कबीर, गोरक्षनाथ, संत दादु, संत मीराबाई, पलटुदा स एवं अन्य संतों की वाणियां जनता तक पहुंचाते। संतों के भजन मालवी रुपांतरण के साथ प्रस्तुत किया करते। ग्रामीण मालवांचल के लोग अत्यंत श्रद्धा के साथ बड़ी तादात में इकट्ठा होकर उन्हें सुना करते थे। ये कार्यक्रम रात रात भर चला करते थे। 

विरासत में मिला गायन
भेरूसिंह अपने पिताजी माधुसिंह चौहान के साथ ही लोक गायन किया करते थे। यह कला इनको विरासत में मिली है। वह कार्यक्रमों की निरंतरता विगत 45 वर्षों से करते आ रहे हैं। भेरूसिंह चौहान ने बताया कि उन्होंने देश और दुनिया में कबीर वाणी की प्रस्तुतियां दी। उन्हें ईश्वर ने यह मौका दिया कि वे भक्ति के रस को दुनिया में पहुंचा सकें यह उनका सौभाग्य रहा। उन्होंने कहा कि संगीत, गायन जैसे क्षेत्र आपको संतुष्टि देने के साथ ही ईश्वर से भी जोड़ते हैं। भेरूसिंह ने दुनियाभर के नामी कलाकारों के साथ प्रस्तुतियां दी हैं और उनका मानना है कि कोई कलाकार छोटा या बड़ा नहीं होता, सबकी एक विशेषता है और सभी की शैली का महत्व है। 
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