Indore News: कोर्ट और कैबिनेट के फैसलों की अनदेखी के चलते मेडिकल कॉलेज के टीचर डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध शुरू किया। अगर 24 फरवरी तक मांगे नहीं मानी गईं, तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन होगा।
कोर्ट से लेकर केबिनेट के फैसलों को नजरअंदाज करने की वजह से मेडिकल कॉलेज, टीचर डॉक्टर्स और प्रोफेसर्स ने आज से काली पट्टी बांधकर शासन के खिलाफ विरोध जताना शुरू कर दिया है। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि हम 24 फरवरी तक लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताते रहेंगे, मगर इसके बावजूद शासन ने कोर्ट के आदेश और केबिनेट द्वारा मंजूर फैसलों पर अमल नहीं किया तो अपने अधिकारों के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए मजबूरी में उग्र आंदोलन चलाना पड़ेगा।
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काली पट्टी लगाकर विरोध शुरू
आज से मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन एमजीएम के नेतृत्व में जिला अस्पताल, ईएसआई अस्पताल, मेडिकल कॉलेज में काली पट्टी लगाकर विरोध जताना शुरू कर दिया है। कल लंच टाइम में आधे घंटे 1 से 2 बजे तक अपने कार्यस्थल के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 22 फरवरी को प्रदेश के समस्त चिकित्सक सामूहिक उपवास रखेंगे, वहीं लंच टाइम में मास्क पहनकर कार्य स्थल के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 24 फरवरी इंदौर सहित प्रदेश के सारे चिकित्सक सामूहिक उपवास करते हुए चिन्हित अस्पतालों में जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ के विरोध में अमानक दवाइयों की सांकेतिक होली जलाएंगे, वहीं 25 फरवरी से इंदौर से लेकर सारे राज्य में प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
दो सप्ताह में मुद्दे सुलझाने का आदेश दिया था
उच्च न्यायालय द्वारा 4 दिसंबर 2024 के अपने आदेश में 2 सप्ताह में हाई पॉवर कमिटी का गठन एवं उससे अगले 2 सप्ताह में डॉक्टरों के मुद्दे सुलझाने का आदेश दिया गया था, जो आज दिनांक तक लागू नहीं किया गया। मध्य प्रदेश कैबिनेट से पारित समयमान चयन वेतनमान का अभी तक कई चिकित्सकों एवं चिकित्सा शिक्षकों को लाभ नहीं मिल रहा है। 4 अक्टूबर 2023 में पारित आदेश के अनुसार सातवें वेतनमान का वास्तविक लाभ जनवरी 2016 से दिया जाना था, साथ ही एनपीए की गणना सातवें वेतनमान के अनुरूप होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ है। एमपीपीएचसीएल द्वारा सप्लाई की गई कई दवाइयां अमानक पाई गईं, जिनमें कुछ दवाइयां आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर में उपयोग होने वाली जीवनरक्षक दवाइयां भी शामिल हैं। यह मामला उजागर होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज में हुई दुखद घटना के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कोई पहल नहीं की गई है।
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उग्र हो सकता है आंदोलन
तकनीकी विशेषज्ञों के स्थान पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति के कारण प्रदेश की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था अधर में लटक चुकी है। इस लापरवाही और अनदेखी के खिलाफ डॉक्टर और मेडिकल प्रोफेसर अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और अगर सरकार जल्द से जल्द समाधान नहीं निकालती तो उग्र आंदोलन अपरिहार्य होगा।