इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज, जहां किशोर कुमार ने की पढ़ाई।
- फोटो : अमर उजाला
कॉलेज क सभागार जहां किशोर कुमार करते थे कार्यक्रम।
- फोटो : अमर उजाला
काका के कैंटीन की उधारी
प्रो. कवठेकर पुरानी बातों को स्मरण करते बताते हैं कि कॉलेज में एक काका का कैंटीन था। किशोर कुमार ने काका से पांच रुपये बारह आने उधार कर रखे थे, जिसका जिक्र उन्होंने 1958 में चलती का नाम गाड़ी फिल्म के एक में गीत किया है, उस वक्त की यह सबसे सफल और बॉक्स ऑफिस पर सर्वाधिक कमाई वाली फिल्म थी।
खंडवा की यादों में बसे हैं किशोर दा
खंडवा में किशोर प्रेरणा मंच गठित हैं, जो प्रतिवर्ष किशोर कुमार के जन्मदिन और पुण्यतिथि पर किशोर दा के गीत का कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें याद करता है। खंडवा के विनीत धनवारिया बताते हैं कि खंडवा के लाला की जलेबी और दूध किशोर कुमार को बहुत पसंद था, इसलिए उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें इसी का भोग लगाया जाता है और वितरित किया जाता है। खंडवा में 100 से अधिक स्थानों पर किशोर कुमार के गीतों पर आधारित कार्यक्रम होते हैं।
जर्जर हो रहा है पैतृक मकान
किशोर कुमार का पैतृक मकान जर्जर हो रहा है, उस निवास को संग्रहालय में तब्दील कर सुसज्जित किया जाना चाहिए। आज किशोर कुमार तो दुनिया में नहीं हैं, पर उनके गीतों की मधुर गूंज सदा रहेगी। उनके असंख्य चाहने वाले उनके गीत गुनगुनाकर उन्हें याद करते हैं और हमेशा याद करते रहेंगे।