फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किशोर कुमार पुण्यतिथि: ‘घुंघरूवाला’ क्लब से शुरू हुआ सफर और बन गए अमर गायक, जानिए कॉलेज के दिनों की अनसुनी

सार

महान गायक, अभिनेता और संगीतकार स्व. किशोर कुमार की पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी किशोर दा ने न केवल गायन, बल्कि अभिनय में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनका जुड़ाव इंदौर और खंडवा से गहरा था।
विज्ञापन
किशोर दा के बेटे अमित पिता के कॉलेज को देखने आए करीब तीन दशक पूर्व का चित्र। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश आज महान गायक स्व. किशोर कुमार की पुण्य तिथि मना रहा है। किशोर दा बहु-आयामी कला और व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं। उनके निधन के 38 वर्ष बीत जाने के बाद भी इंदौर और खंडवा में उनके द्वारा बिताए गए दिनों की यादें उनके चाहने वालों के जेहन में ताजा हैं। किशोर कुमार के परिवार में कला के जन्मजात गुण थे। अशोक कुमार, किशोर कुमार और अनूप कुमार तीनों भाई चित्रपट पर अपना जौहर दिखा चुके थे। 1958 में निर्मित फिल्म ''चलती का नाम गाड़ी'' में तीनों भाइयों ने अभिनय किया था। किशोर कुमार अभिनय के साथ गायन में भी अव्वल थे। वर्ष 2013 में फिल्म फेयर द्वारा करवाए एक सर्वेक्षण में सर्वाधिक लोकप्रिय पुरुष गायन के लिए उनका नाम उभरकर सामने आया था। किशोर कुमार की गायन की अदाएं निराली थीं। उन्होंने कई भारतीय भाषाओं में गीत गाए थे। किशोर दा को खंडवा के लाला की जलेबी और दूध बहुत पसंद था।

विज्ञापन


प्रसून जोशी होंगे किशोर सम्मान से अलंकृत
खंडवा में किशोर कुमार की पुण्यतिथि 13 अक्तूबर को गीत संगीत का दो दिनी कार्यक्रम शुरू होगा। 14 अक्तूबर को प्रसिद्ध गीतकार प्रसून जोशी को मध्य प्रदेश सरकार के वर्ष 2024 के किशोर सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।

1946 में इंदौर में पढ़ने आए थे दो भाई
निमाड़ के खंडवा में गांगुली परिवार में जन्मे किशोर कुमार के पिता कुंजलाल गांगुली वकील थे। हर पिता यह चाहता है कि बेटे उनकी रेखा को और बड़ी करें। किशोर कुमार और अनूप कुमार पढ़ाई करने इंदौर 1946 में इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में प्रवेश लिया था। वे कॉलेज के हॉस्टल में ही रहते थे।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- रील के चक्कर में नदी में बहा बालक, देखते रहे दोस्त, 36 घंटे बाद भी नहीं मिला लापता अंश

इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज, जहां किशोर कुमार ने की पढ़ाई। - फोटो : अमर उजाला
कॉलेज के शताब्दी समारोह में 1987 में इंदौर आने वाले थे
1887 में इंदौर में स्थापित क्रिश्चियन कॉलेज में किशोर कुमार और अनूप कुमार का छात्र के रूप में पंजीयन 1946 में हुआ था। उस वक्त किशोर कुमार की उम्र 19 वर्ष के करीब थी। कॉलेज के पूर्व छात्र लक्ष्मीकांत पंडित बताते हैं कि कॉलेज के शताब्दी समारोह में किशोर कुमार को निमंत्रित करने और इंदौर आने के लिए कुछ छात्र उनसे मिले थे। उन्होंने तत्काल हां भी कर दी थी, लेकिन नियति को यह मंजूर नहीं था। शताब्दी समारोह मनाए जाने के पूर्व ही 1987 में उनका निधन हो गया। किशोर कुमार के सहपाठी मधुसूदन होलकर साथ में पढ़े थे। वे बताते हैं कि कॉलेज जीवन से ही किशोर बहुत नटखट, शरारती और मजाकिया थे।

प्रो. कवठेकर और प्रो. वाजपेयी ने धूल में खंगाला रिकॉर्ड
कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर सुरेंद्र कवठेकर और प्रोफेसर स्वरूप वाजपेयी ने तीन दशक पूर्व सोचा कि किशोर कुमार कॉलेज में पढ़े हैं, इसलिए उनका रिकॉर्ड तलाशा जाए। कॉलेज का स्टोर रूम कबाड़ हो रहा था, में दोनों पूर्व प्राध्यापकों ने पहले धूल साफ की और रिकॉर्ड खोजना आरंभ किया। उन्हें एक दिन सफलता हासिल हो गई और किशोर कुमार और अनूप कुमार का कॉलेज में प्रवेश का रिकॉर्ड सुरक्षित मिल गया, जिसे उन्होंने तत्कालीन प्राचार्य को सौंप दिया था। किशोर कुमार ने 11 जुलाई 1946 को कॉलेज में प्रवेश लिया था। किशोर कुमार के पिता कुंजलाल गांगुली ने कॉलेज प्राचार्य को हॉस्टल में प्रवेश के 10 रुपये जमा करवाने का पत्र भी लिखा था।

15 अगस्त 1947 को रखा था गीत संगीत का कार्यक्रम
प्रोफेसर कवठेकर बताते हैं उस वक्त की कॉलेज की पत्रिका में एक आलेख प्रकाशित हुआ था। उसमें उल्लेख है कि किशोर कुमार और अनूप कुमार हॉस्टल में मुशायरा भी आयोजित किया करते थे। उन्होंने एक संस्था बनाई थी, जिसका नाम घुंघरूवाला रखा था। आलेख में जानकारी दर्ज है कि देश की आजादी के दिन किशोर कुमार और उनकी टीम ने कॉलेज परिसर को सजाया था और उस दिन 15 अगस्त की रात तक गीत संगीत का कार्यक्रम हुआ, जिसमें राष्ट्रीय गीतों, कविताओं का गायन हुआ था।
विज्ञापन

कॉलेज क सभागार जहां किशोर कुमार करते थे कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला
काका के कैंटीन की उधारी
प्रो. कवठेकर पुरानी बातों को स्मरण करते बताते हैं कि कॉलेज में एक काका का कैंटीन था। किशोर कुमार ने काका से पांच रुपये बारह आने उधार कर रखे थे, जिसका जिक्र उन्होंने 1958 में चलती का नाम गाड़ी फिल्म के एक में गीत किया है, उस वक्त की यह सबसे सफल और बॉक्स ऑफिस पर सर्वाधिक कमाई वाली फिल्म थी।

खंडवा की यादों में बसे हैं किशोर दा
खंडवा में किशोर प्रेरणा मंच गठित हैं, जो प्रतिवर्ष किशोर कुमार के जन्मदिन और पुण्यतिथि पर किशोर दा के गीत का कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें याद करता है। खंडवा के विनीत धनवारिया बताते हैं कि खंडवा के लाला की जलेबी और दूध किशोर कुमार को बहुत पसंद था, इसलिए उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें इसी का भोग लगाया जाता है और वितरित किया जाता है। खंडवा में 100 से अधिक स्थानों पर किशोर कुमार के गीतों पर आधारित कार्यक्रम होते हैं।

जर्जर हो रहा है पैतृक मकान
किशोर कुमार का पैतृक मकान जर्जर हो रहा है, उस निवास को संग्रहालय में तब्दील कर सुसज्जित किया जाना चाहिए। आज किशोर कुमार तो दुनिया में नहीं हैं, पर उनके गीतों की मधुर गूंज सदा रहेगी। उनके असंख्य चाहने वाले उनके गीत गुनगुनाकर उन्हें याद करते हैं और हमेशा याद करते रहेंगे।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें