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Indore News: 9 फीट की प्रतिमा 51 फुट का गुंबद, समय के साथ बदला खजराना की मां काली का स्वरूप, जानें कहानी

Thu, 25 Sep 2025 01:03 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

मंदिर की स्थापना 1976 में पं. राधेश्याम अग्रवाल ने की थी, और 1991 में नौ फीट ऊंची महाकाली प्रतिमा का भव्य प्रतिष्ठान हुआ। मंदिर परिसर में हवन कुंड और विशाल प्रार्थना हॉल है, जहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना और आरती होती है।
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खजराना का मां काली मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खजराना का नाम का स्मरण होते ही प्रथम पूज्य देवता गणेश के मंदिर का ध्यान आता है। ग्राम खजराना जो अब नगर का हिस्सा हो गया है। किसी समय मध्य शहर से यह सात किलोमीटर दूर था। खजराना का उल्लेख आईना-ए-अकबरी में मिलता है। इस ग्राम में नादरशाह की दरगाह भी है। महाराजा शिवाजीराव होल्कर ने ग्राम खजराना को अपनी द्वितीय पुत्री सविता बाई को जागीर के रूप में दिया था। देवी कालिका दुर्गा का ही एक रूप है, जो विकराल और रौद्र रूप में दिखाई देती हैं। देवी काली का जन्म राक्षसों के संहार के लिए हुआ था। देवी महाकाली की उपासना से सुख, समृद्धि खुशहाली प्राप्त होती है। देवी काली की उपासना असम और पश्चिम बंगाल में ज्यादा की जाती है। काली का अर्थ समय होता है। खजराना में महाकाली का प्रसिद्ध मंदिर भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है।

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पं. राधेश्याम अग्रवाल ने की स्थापना
खजराना स्थित महाकाली मंदिर सड़क से कुछ ऊंचाई पर बना हुआ है। मंदिर के निर्माण की शुरुआत टीले पर 1976 में छोटी सी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कर पं. राधेश्याम अग्रवाल (श्याम बापू) ने की थी। मंदिर में पूजा पाठ अनवरत जारी रही, आरंभ में मंदिर परिसर काफी छोटा था। इसी दौरान खजराना निवासी हरिकृष्ण पटेल को मां काली की पूजा से मनवांछित फल प्राप्त हुआ, तो उन्होंने एक भव्य मंदिर निर्माण हेतु 15 हजार वर्ग फीट जमीन दे दी, इससे मंदिर परिसर काफी विशाल हो गया।

मंदिर निर्माण का मुहूर्त आया 
छोटी मां काली की मूर्ति स्थापित होने के बाद मंदिर में पूजन होता रहा। इस दौरान मंदिर निर्माण का कार्य जारी रहा। वर्ष 1987 में महाकाली की बड़ी प्रतिमा जो नौ फीट ऊंची है, जयपुर के निकट छतोली से बुलवाई गई। मंदिर का मुख्य गुंबद 51 फुट ऊंचा है तथा अन्य दो छोटे गुंबद भी हैं। इस दौरान मंदिर निर्माण कार्य जारी रहा। फरवरी 1991 में मंदिर परिसर में भव्य महाकाली की प्रतिमा विशाल यज्ञ के आयोजन के साथ प्रतिष्ठित की गई। मां काली की विशाल प्रतिमा प्रतिष्ठित होने के बाद मंदिर परिसर ऐसा बनाया गया, जिसमें देवी के सम्मुख हवन कुंड और एक विशाल हाल बनाया गया, जहां पर भक्त बैठ कर देवी की पूजा अर्चना कर सकते हैं।
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अनुष्ठान होते रहते हैं
श्याम बापू के सानिध्य में मंदिर में बड़े अनुष्ठान होते रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि देवी काली की पूजा अर्चना से असाध्य रोग ठीक होते हैं और विजय प्राप्त होती है। पं. राधेश्याम अग्रवाल ने सहस्त्रचंडी यज्ञ और विश्वशांति के लिए मंदिर परिसर में अनुष्ठान किए थे। राधेश्याम अग्रवाल के निधन के बाद पूजन की जिम्मेदारी गुलशन अग्रवाल निर्वाह करते हैं। साथ में आचार्य और विद्वानों की टीम अनुष्ठान कार्य जारी रखे हुए हैं। प्रतिदिन सुबह और सांध्य को आरती होती है। मंदिर परिसर में पारे का शिवलिंग भी दर्शनार्थियों के आकर्षण का केंद्र है। 
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भक्तों का अटूट विश्वास
खजराना गणेश मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है, अधिकतर भक्त जो गणेश मंदिर दर्शन के लिए आते हैं, वे महाकाली मंदिर भी दर्शन के लिए जरूर जाते हैं। खजराना के स्थायी निवासी भी देवी दर्शन के लिए आया करते हैं। यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि देवी काली जीवन में संकटों को हर लेती हैं और विजय दिलवाती हैं। देवी महाकाली के शृंगार के लिए पहले बुकिंग करवानी होती है।

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