मध्य प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक राजधानी माने जाने वाले इंदौर को इस बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) की मेजबानी से वंचित कर दिया गया है, जो शहर के उद्योग और व्यापार संगठनों के बीच गहरी नाराजगी का कारण बन गया है। इंदौर में अब तक सात इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन हो चुका था, जिसमें देश-विदेश के बड़े उद्योगपतियों ने भाग लिया था और राज्य में बड़े निवेश किए थे। इसके परिणामस्वरूप, राज्य में रोजगार के अवसर बढ़े और सरकार के राजस्व में भी इजाफा हुआ। हालांकि, इस बार नई सरकार ने फरवरी 2025 में होने वाली जीआईएस की मेजबानी राजधानी भोपाल को दी है, जबकि इंदौर को एक भी रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित करने का मौका नहीं मिला है। इस निर्णय ने इंदौर के उद्योग जगत और व्यापारिक संगठनों में असंतोष को जन्म दिया है। अब सरकार जनवरी 2025 में इंदौर में अंतरराष्ट्रीय आईटी कॉन्क्लेव आयोजित करने पर विचार कर रही है।
इंदौर को अनदेखा करने की चर्चा
इंदौर के औद्योगिक और व्यापारिक संगठनों का मानना है कि सरकार के इस कदम से शहर की औद्योगिक और व्यापारिक संभावनाओं को अनदेखा किया गया है। इंदौर लंबे समय से प्रदेश में निवेश का केंद्र रहा है और उसकी बुनियादी ढांचे, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए आदर्श वातावरण के कारण यह निवेशकों के लिए एक आकर्षक जगह बन चुका है। साथ ही, इंदौर ने स्वच्छता में अपनी विशेष पहचान बनाई है, जिससे यहां के आयोजन वैश्विक स्तर पर प्रभावी प्रदर्शन करते आए हैं। शहर के संगठनों का यह भी कहना है कि इतने वर्षों के बाद जब इंदौर इस तरह के बड़े आयोजन से वंचित रह गया है, तो इससे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठने लगे हैं।
इंदौर में हुई सातों इन्वेस्टर्स समिट
वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुजरात के वाइब्रेंट गुजरात की तर्ज पर प्रदेश में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन शुरू किया था और तब से सातों इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन इंदौर में ही हुआ था। इन समिट्स में देश-विदेश के बड़े उद्योगपतियों ने भाग लिया और इंदौर में हुए इन आयोजनों के माध्यम से प्रदेश को करोड़ों का निवेश प्राप्त हुआ। इसके परिणामस्वरूप, प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति मिली और रोजगार के अवसर भी बढ़े। इसके बावजूद, इस बार नई सरकार द्वारा इंदौर को समिट आयोजन सूची से बाहर रखने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। यही कारण है कि स्थानीय संगठनों में निराशा और असंतोष की भावना गहराने लगी है।
असंतोष के बावजूद बोलने से बच रहे औद्योगिक संगठन
इंदौर को समिट आयोजन से दूर रखे जाने के निर्णय को लेकर शहर के व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने मुख्यमंत्री से मिलकर इस मुद्दे पर विचार करने का अनुरोध किया है। कई संगठन मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने के लिए आगे आए हैं ताकि सरकार को इंदौर की औद्योगिक क्षमता और इसके प्रभाव को पुनः समझने का मौका मिले। हालांकि, संगठनों के बीच असंतोष होने के बावजूद, कोई भी संगठन सरकार के खिलाफ खुलकर बयान देने के लिए तैयार नहीं है।
इंदौर को सीएम ने दी सौगात
प्रदेश सरकार के निर्णय के बाद, इंदौर को सांत्वना देने के लिए यह घोषणा की गई है कि जनवरी 2025 में इंदौर में एक अंतरराष्ट्रीय आईटी कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह कॉन्क्लेव निवेशकों को इंदौर की ओर आकर्षित करेगा और राज्य में आईटी सेक्टर के विकास को बढ़ावा देगा। कॉन्क्लेव में आईटी स्टार्टअप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर और प्रॉपर्टी से संबंधित कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा। प्रदेश सरकार की ओर से उच्च स्तर पर योजनाएं बनाई जा रही हैं और इसके लिए कई आईटी कंपनियों को निमंत्रण भेजे जा रहे हैं ताकि इस आयोजन में उनकी सहभागिता सुनिश्चित हो सके। सरकार यह भी मानती है कि इस आईटी कॉन्क्लेव के माध्यम से फरवरी में होने वाली जीआईएस के लिए वातावरण तैयार होगा और इंदौर को नए निवेश का एक मंच मिलेगा।
अन्य शहरों को भी देना है मौका
प्रदेश के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंदौर से इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन को हटाने का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के अन्य शहरों को निवेश आकर्षित करने का अवसर देना है। उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए जा चुके हैं, जिससे स्थानीय निवेशकों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला और प्रदेश में लाखों करोड़ों के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। अधिकारी का मानना है कि इंदौर को इतने वर्षों तक जीआईएस और अन्य बड़े आयोजनों की मेजबानी का मौका मिला है और अब समय आ गया है कि प्रदेश के अन्य शहरों को भी अपनी औद्योगिक क्षमता दिखाने का मौका मिले।
इंदौर देगा फिर प्रदेश को गति
इंदौर के उद्योग जगत को संतुष्ट करने के लिए सरकार ने आईटी कॉन्क्लेव की मेजबानी इंदौर को देने का निर्णय लिया है। इस एक दिवसीय कॉन्क्लेव के माध्यम से उम्मीद की जा रही है कि आईटी सेक्टर में नए अवसर पैदा होंगे और इस क्षेत्र में इंदौर की स्थिति और मजबूत होगी। अधिकारी यह भी मानते हैं कि इस कॉन्क्लेव के आयोजन से जीआईएस के लिए माहौल बनेगा और इंदौर को अपनी औद्योगिक और निवेश क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।